सदन में बहस के दौरान आपा खो बैठे वीरभद्र और धूमल
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सदन में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल आमने-सामने हो गए। दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर तीखे प्रहार किया। मामले ने तूल उस वक्त पकड़ा जब नेता प्रतिपक्ष धूमल ने राज्यपाल की ओर से सदन में पढे़ गए श्लोक को दोहराते
हुए प्रदेश सरकार को असत्य से सत्य की ओर ले जाने की बात कही। इस दौरान धूमल ने प्रदेश सरकार पर राज्यपाल से झूठ बुलवाने का आरोप लगाया। यह आरोप मुख्यमंत्री को सहन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राज्यपाल के अभिभाषण को टविस्ट कर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी का घोषणा पत्र पढ़ने से और गरमाया माहौल
इस बीच जब प्रेम कुमार धूमल ने कांग्रेस पार्टी का घोषणा पत्र सदन में पढ़ा और सरकार के तीन साल के कार्यकाल पर खामियां निकालीं तो वीरभद्र सिंह उग्र होकर धूमल पर टिप्पणी करने लगे। धूमल ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि इस तरह टिप्पणी करनी है तो चैंबर में जाकर करें। धूमल ने यहां तक कह दिया कि छठी बार सत्ता संभालते ही वह गड़बड़ा गए हैं।
मुख्यमंत्री के साथ दूसरी नोकझोंक उस वक्त हुई, जब भाजपा विधायक इंद्र सिंह ने सरकार के तीन साल की कार्यप्रणाली और सरकाघाट विस क्षेत्र के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। इस बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इंद्र सिंह पर भड़क गए और दोनों में काफी बहस हुई।
वीरभद्र बोले, धूमल जी मैं चार किताबें लिख सकता हूं
सदन में दोनों नेताओं के बीच नोकझोंक चलती रही तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मैं आप के ऊपर चार किताबें लिख सकता हूं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि हम सब राज्यपाल के हितैषी हैं।
लेकिन एक श्लोक का गलत अर्थ निकाल कर वह भी सरकार पर थोपना पूरी तरह से गलत है। धूमल ने वीरभद्र सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि आपके पास पुराने अनुभव हैं तो विपक्ष द्वारा कही गई बातें सुनने की हिम्मत भी रखें।