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Shimla News: तंग सड़कों पर इलेक्टि्रक बसें चलाने का ट्रायल फेल, जारी रहेगी तंगी
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सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग से आ रहीं दिक्कतें, अभी लोगों को नहीं मिलेगी सुविधा
स्वराज माजदा बसें बंद होने से हो गई है बसों की कमी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला की तंग सड़कों पर लोगों की सुविधा के लिए इलेक्टि्रक बसें चलाने की योजना फिलहाल सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन क्षेत्रों में सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग और संकरा मार्ग होने से बसें रास्ते फंस रही हैं। लिहाजा लोगों को बसों की कमी के चलते जो तंगी झेलनी पड़ रही है वह अभी जारी रहेगी।
एचआरटीसी ने फिलहाल इस योजना पर काम नहीं करने का फैसला लिया है। हाल ही में एचआरटीसी ने इसको लेकर ट्रायल शुरू किया था। एमआई रूम आंदड़ी मार्ग पर इलेक्टि्रक बस को ट्रायल के लिए भेजा था लेकिन यहां पर सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग के कारण बस फंस गई। हालत यह थी कि बस को निकालने के लिए चालक को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद भी जब बात नहीं बनी तो एक पार्किंग से गाड़ियों को निकालकर किसी तरह से बस को निकाला गया। बस फंसने के बाद निगम ने दोबारा इस रूट पर बस नहीं भेजी है।
स्वराज माजदा की बसों की पंद्रह साल की मियाद पूरी होने के बाद 14 जनवरी से सभी बसों को लोकल डिपो से हटा दिया है। ऐसे में डिपो के बाद छोटी बसों की उपलब्धता नहीं है। इस वजह से झंझीड़ी, एमआई रूम आंदड़ी, केल्टी और बरमू समेत कई क्षेत्रों के लोगों को बस सुविधा से महरूम रहना पड़ रहा है। निगम लोगों की सुविधा के लिए यहां पर वर्तमान में टेंपो ट्रैवलर से आवागमन की सुविधा दे रहा है लेकिन इन क्षेत्रों की जनसंख्या को देखते हुए टेंपो ट्रैवलर नाकाफी साबित हो रहे हैं। एचआरटीसी लोकल डिपो के आरएम अंकुर वर्मा ने बताया तंग सड़कों वाले उपनगरों में इलेक्टि्रक बसों को चलाने की योजना थी लेकिन इन मार्गों पर बसों को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं। इसमें बेतरतीब पार्किंग और सड़कों के तंग होने के कारण परेशानी आ रही है।
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लो फ्लोर बसें होने से आ रहीं दिक्कतें
इलेक्टि्रक बसों को खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में चलाने के लिए बनाया है। लो फ्लोर होने के कारण इन बसों को ऊंचे-नीचे संकरे और पहाड़ी क्षेत्र के संपर्क मार्गों पर चलाना मुमकिन नहीं है। इसको देखते एचआरटीसी ने लोगों की सुविधा के लिए पहले इन क्षेत्रों में ट्रायल के तौर पर इन्हें चलाने का फैसला लिया था लेकिन इसके शुरुआती दौर में ही सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसको देखते हुए इस योजना पर फिलहाल डिपो प्रबंधन ने काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में इन क्षेत्रों के हजारों लोगों को बस सुविधा के लिए तब तक इंतजार करना होगा जब तक सरकार और एचआरटीसी प्रबंधन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता।
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स्वराज माजदा बसें बंद होने से हो गई है बसों की कमी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला की तंग सड़कों पर लोगों की सुविधा के लिए इलेक्टि्रक बसें चलाने की योजना फिलहाल सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन क्षेत्रों में सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग और संकरा मार्ग होने से बसें रास्ते फंस रही हैं। लिहाजा लोगों को बसों की कमी के चलते जो तंगी झेलनी पड़ रही है वह अभी जारी रहेगी।
एचआरटीसी ने फिलहाल इस योजना पर काम नहीं करने का फैसला लिया है। हाल ही में एचआरटीसी ने इसको लेकर ट्रायल शुरू किया था। एमआई रूम आंदड़ी मार्ग पर इलेक्टि्रक बस को ट्रायल के लिए भेजा था लेकिन यहां पर सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग के कारण बस फंस गई। हालत यह थी कि बस को निकालने के लिए चालक को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद भी जब बात नहीं बनी तो एक पार्किंग से गाड़ियों को निकालकर किसी तरह से बस को निकाला गया। बस फंसने के बाद निगम ने दोबारा इस रूट पर बस नहीं भेजी है।
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स्वराज माजदा की बसों की पंद्रह साल की मियाद पूरी होने के बाद 14 जनवरी से सभी बसों को लोकल डिपो से हटा दिया है। ऐसे में डिपो के बाद छोटी बसों की उपलब्धता नहीं है। इस वजह से झंझीड़ी, एमआई रूम आंदड़ी, केल्टी और बरमू समेत कई क्षेत्रों के लोगों को बस सुविधा से महरूम रहना पड़ रहा है। निगम लोगों की सुविधा के लिए यहां पर वर्तमान में टेंपो ट्रैवलर से आवागमन की सुविधा दे रहा है लेकिन इन क्षेत्रों की जनसंख्या को देखते हुए टेंपो ट्रैवलर नाकाफी साबित हो रहे हैं। एचआरटीसी लोकल डिपो के आरएम अंकुर वर्मा ने बताया तंग सड़कों वाले उपनगरों में इलेक्टि्रक बसों को चलाने की योजना थी लेकिन इन मार्गों पर बसों को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं। इसमें बेतरतीब पार्किंग और सड़कों के तंग होने के कारण परेशानी आ रही है।
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लो फ्लोर बसें होने से आ रहीं दिक्कतें
इलेक्टि्रक बसों को खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में चलाने के लिए बनाया है। लो फ्लोर होने के कारण इन बसों को ऊंचे-नीचे संकरे और पहाड़ी क्षेत्र के संपर्क मार्गों पर चलाना मुमकिन नहीं है। इसको देखते एचआरटीसी ने लोगों की सुविधा के लिए पहले इन क्षेत्रों में ट्रायल के तौर पर इन्हें चलाने का फैसला लिया था लेकिन इसके शुरुआती दौर में ही सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसको देखते हुए इस योजना पर फिलहाल डिपो प्रबंधन ने काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में इन क्षेत्रों के हजारों लोगों को बस सुविधा के लिए तब तक इंतजार करना होगा जब तक सरकार और एचआरटीसी प्रबंधन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता।