एसपी ने खनन पर कार्रवाई को पत्र लिखा तो कर दिया तबादला, ऐसे हुआ खुलासा
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खनन माफिया को खत्म करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली जयराम सरकार की पोल ऊना में एसपी संजीव गांधी के तबादले से खुल गई। 07 जनवरी 2018 को तत्कालीन एसपी संजीव गांधी ने उपायुक्त को पत्र नंबर आर/एसपी/18 भेजकर जिला में अवैध खनन की गतिविधियों का खुलासा किया था।
लेकिन एसपी के इनपुट और सुझाव पर अमल करने के बजाय सरकार ने पत्र लिखने के अगले ही दिन 8 जनवरी 2018 को उनका तबादला कर दिया। एसपी ने उपायुक्त के मार्फत लगातार दो पत्र लिखकर जिला में जारी अवैध खनन को तकनीकी कमेटी के गठन, जीपीएस ट्रैकिंग और एलाइन विभागों से मदद की
आवश्यकता बताई थी। इन पत्रों की प्रतियां प्रधान गृह सचिव, उद्योग विभाग के सचिव, मंडलीय आयुक्त धर्मशाला और आईजी नॉर्थ को भी प्रेषित की गई थीं। पत्रों में लिखा गया कि स्वां नदी में खनन माफिया ने 20 से 30 फीट तक गहरी और लंबी खाइयां बना दी हैं।
वीडियोग्राफी से जुटाए सबूतों के आधार एसपी ने खुलासा किया कि क्रशरों से लोड हो रहे 25 टन की क्षमता वाले टिपरों में 50 टन तक अवैध रूप से माल लादा जा रहा है।
एसपी के तबादले में इनका हाथ
पुख्ता सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2017 में बतौर एसपी ज्वाइन करने वाले गांधी के तबादले में पूरी तरह से खनन माफिया का हाथ है। इस बात की पुष्टि अमर उजाला के पास मौजूद उन खतों से भी होती है, जिनमें खनन के पूरे खेल की रिपोर्ट परत दर परत पेश की गई थी।
खनन माफिया के खिलाफ पूर्व एसपी की तरह ही सक्रिय नवनियुक्त एसपी दिवाकर शर्मा भी अब अवैध खनन कारोबारियों की नजर में हैं। गश्त पर निकले एसपी दिवाकर शर्मा की गाड़ी का खनन से जुड़े लोगों द्वारा पीछा करना माफिया की सक्रियता की पुष्टि करता है। बहरहाल, जिला में यह गोरखधंधा कई सालों से फल-फूल रहा है।
खनन माफिया का करेंगे सफाया : दिवाकर
जिला पुलिस अधीक्षक दिवाकर शर्मा ने कहा कि पुलिस खनन माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। आधी रात को भी दबिश दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व एसपी ने अगर किसी तरह के सुझाव या इनपुट दिए हैं तो पुलिस उस पर भी काम करेगी।