अधिवक्ताओं के प्रदर्शन में व्यापारी भी कूदे, डीसी कार्यालय के बाहर बोला हल्ला
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हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पुलिस की शहर की प्रतिबंधित सड़कों से गुजरने वाले वाहनों पर शुरू हुई कार्रवाई से मचा घमासान तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को अधिवक्ताओं ने डीसी परिसर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
इस दौरान अधिवक्ताओं ने करीब तीन घंटे तक सरकार और जजों के खिलाफ नारेबाजी की। लगातार दो दिन बालूगंज थाना के बाहर प्रदर्शन करने के बाद आज अधिवक्ताओं ने डीसी कार्यालय परिसर के बाहर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के तीसरे दिन जिला बार एसोसिएशन के आंदोलन में व्यापार मंडल और सीनियर सिटीजन भी शामिल हो गए।बुधवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे अधिवक्ता सैकड़ों की तादात में एजी कार्यालय के पास एकत्रित हुए।
इसके बाद अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के दिए आदेशों और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंचे। वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी चौहान ने रैली को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि वकील कामकाज बंद रखकर इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं, इसके लिए कौन जिम्मेवार हैं। प्रतिबंधित मार्गों को खोला जाए तो शहर का आधा ट्रैफिक कम हो जाएगा। लेकिन हाईकोर्ट के जजों नेे प्रतिबंधित मार्गों को खुद ही बंद कर दिया।
इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। वीआईपी बिना परमिट के जा रहे हैं जबकि वकीलों की गाड़ियों को रोका जा रहा है। इस बीच अधिवक्ताओं ने तालियां बजाकर रोष प्रदर्शन किया।
वकीलों ने साफ किया कि प्रतिबंधित मार्ग से जब तक उन्हें वाहनों को ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इसमें आम लोगों को राहत प्रदान करें।
पूरे प्रदेश की कचहरियों में बंद रहेगा कामकाज
जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर वीरवार को पूरे प्रदेश की कचहरियों में कामकाज ठप रहेगा। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरकैक ने बताया कि सरकार की ओर से ट्रिब्यूनल कोर्ट को बंद करने और प्रदेशभर के वकीलों को होने वाली कठिनाईयों को लेकर वीरवार को पूरे प्रदेश में कचहरियों में अधिवक्ता कामकाज ठप रखेंगे।
मुख्यमंत्री को नजर नहीं आ रही लोगों की समस्या
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री को आम जनता की समस्या नहीं दिख रही। इन्हें सिर्फ अपना हेलीकाप्टर नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री को लोगों की समस्या नजर नहीं आ रही, उनके सिर्फ हेलीकाप्टर में तेल भरा होना चाहिए। कहा कि शहर की जनता पार्किंग की कमी से पहले ही परेशान है, अब ऊपर से इन आदेशों ने परेशानी को और बढ़ा दिया है।
शिमला हमारे बुजुर्गों ने बसाया : कारोबारी
व्यापारमंडल के सदस्य कपिल महाशय ने बताया कि शिमला शहर को हमारे बुजुर्गोें ने बसाया है। आज मालरोड पर चलना भी मुश्किल हो गया है। करीब तीन महीने में एक भी गाड़ी मालरोड नहीं आई है। शहर में यदि प्रतिबंधित और सील्ड मार्गों को गाड़ियों के लिए खोला जाएगा तो इससे व्यापार में इजाफा होगा।