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मिड-डे मील में गोलमाल करने वालों की आएगी शामत

Mon, 04 Jul 2016 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 04 Jul 2016 09:40 AM IST
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toll free number launched for mid day meal complaints
मिड-डे-मील

सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में घपला करने वालों की शामत आने वाली है। सरकार ने अधिसूचना जारी कर प्रारंभिक शिक्षा विभाग के जिला उपनिदेशकों को मिड-डे मील से जुड़े मामलों की जांच को शिकायत निवारण अफसर नियुक्त किया है। इन्हें एक महीने में मिड-डे मील की शिकायतें निपटाने के निर्देश दिए हैं।

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अगर उपनिदेशक देरी करते हैं तो निदेशक मामले की जांच करेंगे। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक 5.30 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। मिड-डे मील योजना में बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल में उपलब्ध करवाया जाता है। अधिसूचना के मुताबिक अब बच्चों को स्कूलों में गंदा खाना देने, कम और देरी से खाना देने के मामलों की शिकायत आसानी से की जा सकेगी। हिंदी या अंग्रेजी भाषा में शिकायत पत्र जिला उपनिदेशकों को दे सकेंगे। वे शिकायतों की जांच में आनाकानी नहीं कर सकेंगे।
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इन्हें सरकार ने जिला शिकायत निवारण अफसर नियुक्त किया है। शिकायत पर जिला उपनिदेशक को फील्ड से रिपोर्ट जुटानी होगी। एक महीने में मामले की जांच करनी होगी। शिकायत के निवारण को सुझाव भी देने होंगे। एक माह में जांच पूरी नहीं होने पर उपनिदेशक को कारण बताना होगा। मिड-डे मील में गुणवत्ता लाने को सरकार ने व्यवस्था की है।

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टोल फ्री नंबर पर भी कर सकते हैं शिकायत

toll free number launched for mid day meal complaints
मिड-डे-मील

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने मध्यान भोजन से जुड़ी शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर की व्यवस्था की है। प्रदेश के किसी भी क्षेत्र से लोग 1800-180-8007 नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। निदेशालय शिकायत पर फौरन कार्रवाई करेगा। शिकायत आने वाले स्कूल में अधिकारियों को भेज कर मामले की जांच की जाएगी।

मोबाइल फोन से नजर रखने की तैयारी

मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचने को केंद्र सरकार प्रदेश में ऑटोमेटिड एसएमएस योजना शुरू कर रही है। इसके तहत कितने बच्चे स्कूल में मौजूद रहे। कितनों ने दोपहर को मिलने वाला निशुल्क भोजन किया। इसकी दोपहर दो बजे तक केंद्र और राज्य सरकार के

पास एसएमएस से डिटेल पहुंच जाएगी। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का काम देख रहे करीब 14 हजार शिक्षकों का प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। सभी शिक्षकों के नाम और मोबाइल नंबरों का डाटा तैयार कर एनआईसी ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है। जल्द इस योजना को शुरू किया जाएगा।

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