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काल सृजन और पतन का भी परिचायक: डॉ. चंदेल
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गेयटी कालगणना की प्रासंगिकता पर हुई संगोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के सम्मेलन कक्ष में वीरवार को एचपीयू इकाई ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर की ओर से संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय प्राचीन भारतीय कालगणना की वैज्ञानिक प्रासंगिकता एवं आधार रखा था। इस दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ चंडीगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चमन चंदेल ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की।
उन्होंने ब्रह्मांडीय संरचना की परिकल्पना और काल गणना पर अपने बहुमूल्य एक तथ्यात्मक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि काल सर्वश्रेष्ठ है, वह केवल समय नहीं बल्कि सृजन और पतन का परिचायक भी है। काल की तीन महत्वपूर्ण ईकाइयां हैं जिनमें-सूक्ष्म इकाई, मध्यम इकाई, ब्रह्मांडीय इकाई शामिल है। राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर के निदेशक डॉ. चेतराम गर्ग ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में काल गणना एक वैज्ञानिक विषय है जिसका शास्त्रों में तथा ज्योतिष में उल्लेख है। इस अवसर पर एचपीयू यूआईटी विभाग के प्राध्यापक महेश शर्मा, एचपीयू कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. कर्म सिंह, एचपीयू के प्रोफेसर डॉक्टर बीआर ठाकुर, प्रोफेसर अंकुश भारद्वाज, डॉ. रोशनी भारद्वाज, डॉ. पवन सिंह, डॉ. सन्नी सहित एचपीयू के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के सम्मेलन कक्ष में वीरवार को एचपीयू इकाई ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर की ओर से संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय प्राचीन भारतीय कालगणना की वैज्ञानिक प्रासंगिकता एवं आधार रखा था। इस दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ चंडीगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चमन चंदेल ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की।
उन्होंने ब्रह्मांडीय संरचना की परिकल्पना और काल गणना पर अपने बहुमूल्य एक तथ्यात्मक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि काल सर्वश्रेष्ठ है, वह केवल समय नहीं बल्कि सृजन और पतन का परिचायक भी है। काल की तीन महत्वपूर्ण ईकाइयां हैं जिनमें-सूक्ष्म इकाई, मध्यम इकाई, ब्रह्मांडीय इकाई शामिल है। राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर के निदेशक डॉ. चेतराम गर्ग ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में काल गणना एक वैज्ञानिक विषय है जिसका शास्त्रों में तथा ज्योतिष में उल्लेख है। इस अवसर पर एचपीयू यूआईटी विभाग के प्राध्यापक महेश शर्मा, एचपीयू कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. कर्म सिंह, एचपीयू के प्रोफेसर डॉक्टर बीआर ठाकुर, प्रोफेसर अंकुश भारद्वाज, डॉ. रोशनी भारद्वाज, डॉ. पवन सिंह, डॉ. सन्नी सहित एचपीयू के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद रहे।
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