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राजभवन में यज्ञशाला बनाने पर सवाल, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 01 Apr 2016 08:49 AM IST
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बीते बुधवार को राज भवन में स्थायी यज्ञशाला स्थापित की गई है।
- फोटो : फाइल फोटो
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नगर निगम शिमला के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने राजभवन में यज्ञशाला स्थापित करने पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा कि राज्यपाल के सरकारी आवास राजभवन में संविधान के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत की अनदेखी की गई है। इस सिद्धांत की सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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पत्र में लिखा है कि धर्म निरपेक्षता हमारे देश की मूल आत्मा का केंद्र है। हम धर्म केंद्रित यानी धर्म आधारित नहीं, बल्कि एक जनवादी धर्म निरपेक्ष गणराज्य, जिसकी परिभाषा में राज्य किसी पर धर्म नहीं थोपेगा या राज्य यदि संवैधानिक संशोधन भी करता है तो भी सभी धर्मों को बराबरी से देखा जाएगा।
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कहा है कि राज्यपाल का शासकीय आवास राज्य का एक संस्थान है, जो संवैधानिक दिशा निर्देशों के तहत चालित होता है। राज्यपाल को व्यक्तिगत तौर पर अपने धर्म को मानने की पूरी आजादी है, मगर एक राज्य के राज्यपाल के तौर पर राज्य द्वारा चालित संस्थान में स्थायी यज्ञशाला की स्थापना नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस यज्ञशाला को उखाड़े जाने की मांग की है।
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धर्म निरपेक्ष राज्य की परिभाषा- पंवर ने धर्म निरपेक्ष राज्य की परिभाषा भी बताई है। इसके मुताबिक धर्म निरपेक्ष राज्य वह है जो धर्म की व्यक्तिगत और समवेत स्वतंत्रता प्रदान करता है। संवैधानिक रूप से किसी धर्म विशेष से जुड़ा हुआ नहीं है, जो न तो धर्म का प्रचार करता है और न ही उसमें हस्तक्षेप करता है।
धर्म निरपेक्ष राज्य पंत के सभी भेदभावों से ऊपर उठकर अपने सभी नागरिकों को उनके धार्मिक विश्वासों और व्यवहारों की ओर ध्यान दिए बगैर कल्याण सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। वो सभी जातियों और संप्रदायों के नागरिकों को लाभ देने में तटस्थ या निष्पक्ष रहता है।