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Shimla News: तीन मानसून, तीन भूस्खलन... सुरक्षा के इंतजाम फिर भी अधूरे

Tue, 30 Jun 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:59 PM IST
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Three monsoons, three landslides... yet safety measures remain incomplete.
समरहिल में भूस्खलन रोकने के लिए करोड़ों रूपये फूंके, सड़क पर खतरा अभी भी बरकरार, नहीं हो पाया स्थायी समाधान
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मानसून ये कैसी तैयारी-2..
वर्ष 2023 की आपदा में बंद हुई थी समरहिल-बालूगंज सड़क
4 करोड़ से बनाई दीवार ढह चुकी, मानसून में सड़क को खतरा
राजधानी में पिछले तीन मानसून के दौरान समरहिल क्षेत्र भूस्खलन की सबसे बड़ी घटनाओं का केंद्र रहा है। वर्ष 2023 की आपदा के बाद इस संवेदनशील इलाके में स्थायी सुरक्षा उपायों के दावे किए गए लेकिन कई अहम कार्य अब भी अधूरे हैं। मानसून फिर दस्तक देने जा रहा है लेकिन मौके पर काम बंद पड़ा है। हजारों लोगों की आवाजाही वाले समरहिल-बालूगंज मार्ग पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है। पेश है रिपोर्ट:-


संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले समरहिल-बालूगंज सड़क पर खतरा बरकरार है। तीन साल में तीन बार इस सड़क पर भूस्खलन हो चुका है। इससे कई दिन सड़क बंद रही है। इस बरसात में भी इस सड़क को भूस्खलन का खतरा है।
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काम की बात करें तो मौके पर भूस्खलन रोकने के लिए डंगा लगाने का काम शुरू किया जा रहा है लेकिन पिछले कई दिन से यह बंद पड़ा है। सड़क किनारे निर्माण सामग्री तो रखी है लेकिन मजदूर नहीं है। सड़क के ऊपर खड़ी पहाड़ी की चट्टानें कभी भी दरक सकती हैं। प्रदेश विश्वविद्यालय को जोड़ने वाली इस सड़क से रोजाना हजारों लोग खासकर छात्र आवाजाही करते हैं। वर्ष 2023 में पहली बार इस सड़क पर भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गया था, उस समय सिर्फ सड़क का मलबा हटाया गया। वर्ष 2024 में फिर यहां भूस्खलन हुआ। इसके बाद मलबा हटाया गया और मौके पर सुरक्षा दीवार लगाने का फैसला लिया गया। बीते साल नवंबर में यहां डंगा लगकर तैयार हो गया। इस पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे। इस साल गर्मी के मौसम में ही 10 अप्रैल को यह डंगा फिर ढह गया। डंगा गिरने के समय सवारियों से भरी एक निजी बस भी यहां से गुजर रही थी जो बाल-बाल बच गई। बरसात शुरू होने से पहले डंगे की मरम्मत पूरी करने की उम्मीद थी लेकिन अब तक मौके पर काम शुरू नहीं हो पाया है। प्रभावित हिस्से में केवल अस्थायी सुरक्षा उपाय किए गए हैं। सड़क अभी भी एकतरफा चलाई जा रही है।
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आपदा में 20 लोगों ने गंवाई थी जान
यह वही क्षेत्र है जहां अगस्त 2023 में भारी बारिश के दौरान बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान परिसर के पास पहाड़ी दरकने से बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आया था। इस दौरान समरहिल के शिव बावड़ी क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन में 20 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने स्पष्ट तौर पर ढलानों के वैज्ञानिक उपचार, वर्षा जल की समुचित निकासी और संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी की सिफारिश की थी। इनमें डंगे का निर्माण और जल निकासी के कार्य तीन साल बाद भी अधूरे हैं। स्थानीय निवासी चेतना शर्मा, सुनील कुमार, वीरेंद्र सिंह का कहना है कि जिस स्थान पर डंगा गिरा है, वहां हर बरसात में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है।


वैकल्पिक मार्ग पर भी लटका खतरा
समरहिल-बालूगंज मार्ग बाधित होने की स्थिति में अधिकांश यातायात बालूगंज-सांगटी सड़क पर डायवर्ट किया जाता है लेकिन यह वैकल्पिक मार्ग भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। सड़क के ऊपर सैकड़ों पेड़ टेढ़े हो चुके हैं। यह कभी भी ढह सकते हैं। पिछले साल इस मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हो चुका है। बरसात से पहले जोखिम वाले पेड़ों को हटाने और ढलानों को सुरक्षित करने की मांग लंबे समय से उठ रही है।



रेल लाइन पर सुरक्षा कार्य जारी
समरहिल-शिव बावड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली कालका-शिमला रेल लाइन पर रेलवे विभाग ढलानों को सुरक्षित बनाने के लिए रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज और अन्य सुरक्षात्मक कार्य करा रहा है। 2023 की आपदा के बाद इन कार्यों में तेजी लाई गई ताकि वर्षा का पानी सीधे ढलानों को कमजोर न करे और मलबा रेल ट्रैक तक न पहुंचे। हालांकि परियोजना के कई हिस्सों में काम अभी भी जारी है और मानसून शुरू होने से पहले इसके पूरा होने की संभावना नहीं है। ऐसे में लगातार बारिश के दौरान इस पूरे हिस्से पर विशेष निगरानी रखनी होगी।
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