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मृत मछलियों को डंप करने वाले आधा दर्जन कर्मचारी बीमार

Sat, 22 Apr 2017 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रिवालसर (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, रिवालसर (मंडी) Updated Sat, 22 Apr 2017 10:39 PM IST
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Thousands of fish dying in Rewalsar lake Mandi himachal Pradesh

रिवालसर झील में शनिवार को भी मछलियों के मरने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान राहत व बचाव कार्यों में जुटे करीब आधा दर्जन विभागीय कर्मचारी बीमारी की चपेट में आ गए हैं। हालांकि, यह कर्मी अस्पताल में इलाज के लिए नहीं पहुंचे हैं, लेकिन इनमें उल्टी दस्त की शिकायत सामने आई है। पीड़ितों ने निजी क्लीनिक से दवाई ली है। वहीं, पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने मछलियों का पोस्टमार्टम कर बिसरा रिपोर्ट पालमपुर स्थित प्रयोगशाला के लिए भेज दी है। 

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झील में लगातार मछलियों के मरने से क्षेत्र में महामारी फैसले का खतरा बढ़ता जा रहा है। शनिवार को भी झील से लगभग छह टन मरी हुई मछलियां निकाली गई। इससे आशंका जताई जा रही है कि ऑक्सीजन की कमी के साथ मछलियों के मरने का कारण अब किसी बीमारी के चपेट में आना भी हो सकता है। रिवालसर झील के पानी के रंग में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है। 
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चार दिनों से झील से मरी हुई मछलियां निकाल रहे लोक निर्माण विभाग के लगभग 90 कर्मचारियों में से मुनी लाल, प्रेम लाल समेत आधा दर्जन कर्मी उल्टी-दस्त व बुखार से ग्रस्त हो गए हैं। अभी तक रिवालसर झील से लगभग 40 टन मरी मछलियां निकाली जा चुकी है। उधर, प्रभारी पशु चिकित्सालय घनश्याम ठाकुर ने कहा कि मरी मछलियों की बिसरा रिपोर्ट पालमपुर स्थित प्रयोग शाला भेज दी गई है जिसकी रिपोर्ट जल्द ही मिल जाएगी।
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कृत्रिम ऑक्सीजन के 30 सिलेंडर दिए
मंडी के एक कारोबारी सुधांशु कपूर ने रिवालसर झील में जिंदा मछलियों को बचाने के लिए कृत्रिम ऑक्सीजन के 30 सिलेंडर अपनी ओर से प्रशासन को दिए हैं। इसके अलावा आईपीएच और अग्निशमन विभाग लगातार झील में शुद्ध पानी डाल रहा है ताकि जिंदा मछलियों को बचाया जा सके। नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग, रिवासलर डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप, तिब्बतियन समुदाय, टैक्सी यूनियन, नैना माता कमेटी और स्थानीय लोगों झील की मछलियों को बचाने के लिए दिन रात कोशिश कर रहे हैं। 


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देशराज शर्मा ने कहा कि उन्होंने स्वयं रिवालसर झील का दौरा किया है। विभाग ने रिवालसर के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है जो वहां पर लगातार सेवाएं दे रही है ताकि राहत कार्य में लगे लोग बीमारी की चपेट में न आ सके।एसडीएम बल्ह सिद्धार्थ आचार्य ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने झील परिसर में खाने-पीने के सामान की बिक्री पर पूरी रोक लगा रखी है। झील से मरी मछलियों को गहरे गड्ढे में दबाया जा रहा है।

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