कोरोना वायरस के खौफ पर भारी पड़ी बाबा के भक्तों की आस्था, हजारों ने नवाया शीश
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उत्तरी भारत के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में चैत्र माह मेले शनिवार को पूजा-अर्चना और झंडा रस्म के साथ शुरू हो गए हैं। कोरोना वायरस जैसी महामारी के बावजूद यूके, कनाडा और ग्रीस समेत विभिन्न देशों के अलावा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में शीश नवाया और मन्नत मांगीं। शनिवार दोपहर 12 बजे झंडा रस्म के दौरान भारी बारिश और ठंड के बावजूद पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों से आए लोगों का जोश ठंडा नहीं हुआ और कतारों में खड़े रहकर क्रमबद्ध तरीके से बाबा बालक नाथ के दर पर शीश नवाया, पूजा अर्चना कर पौणाहारी के जयकारे लगाए।
प्रशासनिक अमला भी कानून व्यवस्था व स्वास्थ्य सुविधाएं श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाने में लगा रहा। मंदिर के महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र गिरि ने बताया कि हर वर्ष की तरह बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं का अथाह विश्वास है। बाबा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसी के चलते लाखों की संख्या में हर साल भक्त यहां पहुंचते हैं।प्रशासनिक अधिकारी सरकारी आदेशों के चलते मंदिर में तो उपस्थित रहे लेकिन झंडा रस्म व आहुतियों डालने से दूर रहे।
सभी जिला अधिकारियों को सरकार से आदेश हैं कि कहीं पर भी ऐसे कार्यक्रम न हों, जहां पर भीड़ इकट्ठी हो। प्रशासन की तरफ से एसडीएम बड़सर प्रदीप कुमार, डीएसपी जसवीर ठाकुर, सीएमओ हमीरपुर डॉ. अर्चना सोनी, मंदिर के महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र गिरि, मंदिर अधिकारी ओपी लखनपाल समेत मंदिर के न्यासी दियोटसिद्ध उपस्थित रहे। उधर, एसडीएम एवं मंदिर चेयरमैन प्रदीप कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव व स्क्रीनिंग के लिए मेडिकल सेंटर खोले गए हैं। यूके, कनाडा और ग्रीस से आने वाले तीन श्रद्धालुओं की पूरी जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई।
बाबा की गुफा के दर्शन के बाद महंत के आवास पर पहुंचते हैं श्रद्धालु
बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा बाबा की गुफा में दर्शन करने के उपरांत श्रद्धालु महंत के आवास पर पहुंचकर आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा को पूरा करते हैं। सदियों से परंपरा है कि बाबा की गुफा में दर्शनों के उपरांत श्रद्धालु महंत की गद्दी पर जाकर माथा टेकते हैं तथा महंत का आशीर्वाद लेते हैं।
न्यास के गठन से पूर्व महंत द्वारा ही श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जिम्मा उठाया जाता था तथा उनके रहने तथा खाने-पीने की व्यवस्था मंदिर में की जाती थी। इसके लिए महंत ने लंगर भवन बनाने के अलावा सराय का भी निर्माण करवाया था जिसमें आकर श्रद्धालु रुकते हैं। आज भले ही इस मंदिर का संचालन न्यास द्वारा किया जाता है परंतु देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा की गुफा में माथा टेकने के बाद महंत से आशीर्वाद लेकर लौटते हैं।