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Shimla News: चमियाना अस्पताल की कच्ची सड़क बढ़ा रही मरीजों का दर्द
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ग्राउंड रिपोर्ट
बसें चलती नहीं, जाम से भी परेशानी और सड़क
में बिखरी रोड़ी
पर हिचकोले खाते हुए अस्पताल तक पहुंचते हैं मरीज-तीमारदार
सरकारी टैक्सियां कम होने से भी दिक्कत में लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाने वाले मरीजों और तीमारदारों का सफर आसान नहीं है। भट्ठाकुफर से लेकर चमियाना तक सड़क में रोड़ी (हल्के पत्थर) बिखरी हुई है। इस पर वाहन स्किड हो रहे हैं।
कई जगह सड़क संकरी और कच्ची है जिस कारण हर रोज मरीजों, तीमारदारों और चिकित्सकों को जाम में फंसना पड़ता है। अस्पताल के लिए अभी तक सरकारी बस सेवा शुरू नहीं हुई है। शिमला शहर से चमियाना तक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लग रहा है। निजी वाहनों से जाने वालों को भी भट्ठाकुफर से लेकर चमियाना तक की करीब ढाई किलोमीटर की सड़क में जगह-जगह जाम में फंसना पड़ता।
अस्पताल परिसर में भी पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से वाहन सड़क के दोनों ओर खड़े किए जाते हैं। इससे रोज सुबह जाम लगता है जिसमें एंबुलेंस फंसी रहती हैं। ढली टनल के पास सोमवार को अस्पताल जाने के लिए पहुंचे बिलासपुर के दपंती ने बताया कि वह टैक्सी का इंतजार कर रहे थे। गेस्ट्रोलॉजी विभाग में दिखाने के लिए आए हैं। समय से पहुंचने के लिए उन्हें सवारियों से भरी निजी टैक्सी में 40 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से चुका कर अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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मशोबरा से आए एक अन्य मरीज मान सिंह खड़े होने में भी असमर्थ हैं। पिता और पत्नी के साथ वह स्टॉपेज पर खड़े होकर एचआटीसी टैक्सी का इंतजार कर रहे थे। टैक्सी आई तो उसमें पहले से भीड़ होने पर मान सिंह और उसके परिवार के लोग किसी तरह से खड़े-खड़े टैक्सी से अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के पास बेतरतीब पार्क वाहनों के कारण वह भी 20 मिनट तक जाम में फंसे रहे। एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
भट्ठाकुफर-चमियाना अस्पताल तक की ढाई किलोमीटर कच्ची सड़क को चौड़ा किया है लेकिन अस्पताल के पास आधा किलोमीटर हिस्से में अवैध पार्किंग मरीजों पर भारी पड़ रही है। दोपहर डेढ़ बजे अस्पताल से वापस जा रहे वाहन भट्ठाकुफर के पास कच्ची सड़क में फंसे रहे। यहां चढ़ाई है और भारी मात्रा में पत्थर हैं। चमियाना अस्पताल को शुरू हुए एक साल होने को है लेकिन आज भी यहां तक पहुंचना आसान नहीं है।
एचआरटीसी की टैक्सी सेवा कम
चमियाना अस्पताल में रोजाना आठ विभागों की ओपीडी चलती है और इसमें आठ सौ के करीब मरीज चेकअप करवाते हैं। अधिकतर मरीज निजी वाहनों से ही आवाजाही करते हैं। इसके अलावा एचआरटीसी की टैक्सी भी चलती है। वाहनों की अधिक संख्या और पार्किंग की व्यवस्था न होने से हर रोज जाम लग रहा है। सरकारी टैक्सी एक घंटे के अंतराल में चलती है जिस कारण इसमें भीड़ अधिक होती है। मरीजों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। इसलिए मरीजों की इन समस्याओं को दूर करने के लिए अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था और एचआरटीसी की टैक्सियां की संख्या बढ़ाना जरूरी है।
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बसें चलती नहीं, जाम से भी परेशानी और सड़क
में बिखरी रोड़ी
पर हिचकोले खाते हुए अस्पताल तक पहुंचते हैं मरीज-तीमारदार
सरकारी टैक्सियां कम होने से भी दिक्कत में लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाने वाले मरीजों और तीमारदारों का सफर आसान नहीं है। भट्ठाकुफर से लेकर चमियाना तक सड़क में रोड़ी (हल्के पत्थर) बिखरी हुई है। इस पर वाहन स्किड हो रहे हैं।
कई जगह सड़क संकरी और कच्ची है जिस कारण हर रोज मरीजों, तीमारदारों और चिकित्सकों को जाम में फंसना पड़ता है। अस्पताल के लिए अभी तक सरकारी बस सेवा शुरू नहीं हुई है। शिमला शहर से चमियाना तक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लग रहा है। निजी वाहनों से जाने वालों को भी भट्ठाकुफर से लेकर चमियाना तक की करीब ढाई किलोमीटर की सड़क में जगह-जगह जाम में फंसना पड़ता।
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अस्पताल परिसर में भी पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से वाहन सड़क के दोनों ओर खड़े किए जाते हैं। इससे रोज सुबह जाम लगता है जिसमें एंबुलेंस फंसी रहती हैं। ढली टनल के पास सोमवार को अस्पताल जाने के लिए पहुंचे बिलासपुर के दपंती ने बताया कि वह टैक्सी का इंतजार कर रहे थे। गेस्ट्रोलॉजी विभाग में दिखाने के लिए आए हैं। समय से पहुंचने के लिए उन्हें सवारियों से भरी निजी टैक्सी में 40 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से चुका कर अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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मशोबरा से आए एक अन्य मरीज मान सिंह खड़े होने में भी असमर्थ हैं। पिता और पत्नी के साथ वह स्टॉपेज पर खड़े होकर एचआटीसी टैक्सी का इंतजार कर रहे थे। टैक्सी आई तो उसमें पहले से भीड़ होने पर मान सिंह और उसके परिवार के लोग किसी तरह से खड़े-खड़े टैक्सी से अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के पास बेतरतीब पार्क वाहनों के कारण वह भी 20 मिनट तक जाम में फंसे रहे। एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
भट्ठाकुफर-चमियाना अस्पताल तक की ढाई किलोमीटर कच्ची सड़क को चौड़ा किया है लेकिन अस्पताल के पास आधा किलोमीटर हिस्से में अवैध पार्किंग मरीजों पर भारी पड़ रही है। दोपहर डेढ़ बजे अस्पताल से वापस जा रहे वाहन भट्ठाकुफर के पास कच्ची सड़क में फंसे रहे। यहां चढ़ाई है और भारी मात्रा में पत्थर हैं। चमियाना अस्पताल को शुरू हुए एक साल होने को है लेकिन आज भी यहां तक पहुंचना आसान नहीं है।
एचआरटीसी की टैक्सी सेवा कम
चमियाना अस्पताल में रोजाना आठ विभागों की ओपीडी चलती है और इसमें आठ सौ के करीब मरीज चेकअप करवाते हैं। अधिकतर मरीज निजी वाहनों से ही आवाजाही करते हैं। इसके अलावा एचआरटीसी की टैक्सी भी चलती है। वाहनों की अधिक संख्या और पार्किंग की व्यवस्था न होने से हर रोज जाम लग रहा है। सरकारी टैक्सी एक घंटे के अंतराल में चलती है जिस कारण इसमें भीड़ अधिक होती है। मरीजों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। इसलिए मरीजों की इन समस्याओं को दूर करने के लिए अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था और एचआरटीसी की टैक्सियां की संख्या बढ़ाना जरूरी है।