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Shimla News: विवि ने ई-वेस्ट बेचकर कमाए 8 लाख, कुर्सियां खरीदी जाएंगी
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एचपीयू ने 30 साल बाद हटाया गया ई-वेस्ट
वार्षिक निपटान नीति लागू, निगरानी के लिए समिति गठित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला ने अपने विभिन्न विभागों में सालों से जमा ई-वेस्ट को बेचकर करीब 8 लाख रुपये की आय अर्जित की है। विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि परिसर में 30 वर्षों से ई-वेस्ट का नियमित निपटान नहीं हो पाया था जिसके चलते बड़ी मात्रा में अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक कचरा जमा हो गया था।
उन्होंने कहा कि अब इसे व्यवस्थित रूप से हटाया गया है और आगे से अब हर वर्ष ई-वेस्ट के निपटान की नीति लागू की गई है ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। कुलपति ने बताया कि ई-वेस्ट की बिक्री से प्राप्त 8 लाख रुपये की राशि का उपयोग विश्वविद्यालय में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस धनराशि से विभिन्न विभागों और कार्यालयों के लिए नई कुर्सियां खरीदी जाएंगी जिससे छात्रों और कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने ई-वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए एक ई-वेस्ट प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति सभी विभागों में उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कचरे की नियमित निगरानी करेगी और उसके उचित निपटान को सुनिश्चित करेगी। समिति को समय-समय पर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में ई-वेस्ट के संग्रहण, वर्गीकरण और निस्तारण के लिए एक स्पष्ट और सख्त प्रणाली लागू की जाएगी। एचपीयू की यह पहल न केवल परिसर को स्वच्छ बनाने में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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वार्षिक निपटान नीति लागू, निगरानी के लिए समिति गठित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला ने अपने विभिन्न विभागों में सालों से जमा ई-वेस्ट को बेचकर करीब 8 लाख रुपये की आय अर्जित की है। विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि परिसर में 30 वर्षों से ई-वेस्ट का नियमित निपटान नहीं हो पाया था जिसके चलते बड़ी मात्रा में अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक कचरा जमा हो गया था।
उन्होंने कहा कि अब इसे व्यवस्थित रूप से हटाया गया है और आगे से अब हर वर्ष ई-वेस्ट के निपटान की नीति लागू की गई है ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। कुलपति ने बताया कि ई-वेस्ट की बिक्री से प्राप्त 8 लाख रुपये की राशि का उपयोग विश्वविद्यालय में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस धनराशि से विभिन्न विभागों और कार्यालयों के लिए नई कुर्सियां खरीदी जाएंगी जिससे छात्रों और कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी।
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इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने ई-वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए एक ई-वेस्ट प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति सभी विभागों में उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कचरे की नियमित निगरानी करेगी और उसके उचित निपटान को सुनिश्चित करेगी। समिति को समय-समय पर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में ई-वेस्ट के संग्रहण, वर्गीकरण और निस्तारण के लिए एक स्पष्ट और सख्त प्रणाली लागू की जाएगी। एचपीयू की यह पहल न केवल परिसर को स्वच्छ बनाने में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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