बही दूध गंगा और प्रकट हुए बाबा भूतनाथ
मंडी नगर की स्थापना भगवान शिव के रूप बाबा भूतनाथ के मंदिर के साथ ही 1527 ईसवी में राजा अजबर सेन ने ब्यास नदी के पार की थी। जहां पर मंदिर की स्थापना की है।
वहां पर कभी घना जंगल हुआ करता था। लोगों की गायें यहां चरने के लिए आती थीं। इनमें से एक गाय हर रोज उस जगह पर खड़ी हो जाती, जहां पर बाबा भूतनाथ का मंदिर है।
गाय के थनों से स्वयं भी इस जगह पर दूध निकलने लगता। जब इस बात का पता राजा को लगा तो इस जगह की खुदाई की गई। यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।
छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी शहर
इनमें एकादश रुद्र महादेव, रुद्र महादेव, त्रिलोकी नाथ, अर्द्धनारेश्वर, पंचवक्त्र महादेव और नीलकंठ महादेव मंदिर शामिल हैं। यहां सावन के महीने में ओम नमो: शिवाय का मंत्र गूंजायमान रहता है।
इस बार 16 जुलाई से 15 अगस्त तक श्रावण महोत्सव के दौरान मंडी शहर के शिवालयों में शिव भक्तों का तांता लगा रहेगा। इन देवालयों में एक माह तक कई आयोजन होंगे। हर सोमवार को खीर के भंडारे भी लगेंगे।