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हिमाचल विस चुनावः मंत्री की छोटी बेटी पितृऋण उतार रही तो बड़ी निभा रही हैं पत्नी धर्म

Sat, 04 Nov 2017 11:12 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन Updated Sat, 04 Nov 2017 11:12 AM IST
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The son-in-law and the father-in-law from the Solan seat are face-to-face

हिमाचल विधानसभा चुनाव में रिश्तों की भी अग्निपरीक्षा है। सोलन सीट से ससुर और दामाद आमने-सामने हैं। कैबिनेट मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल को कांग्रेस ने फिर मैदान में उतारा है तो भाजपा ने इस बार उनके दामाद राजेश कश्यप को टिकट दिया है।

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शांडिल की दो बेटियां हैं और दोनों ही डॉक्टर हैं। छोटी बेटी डॉ. दिपाली पापा के लिए प्रचार में जुटी हैं। शांडिल के नामांकन दाखिल करने से अब तक डॉ. दिपाली उनके साथ कदमताल कर रही हैं।
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बड़ी बेटी डॉ. गीतांजलि राजेश कश्यप की पत्नी हैं। सरकारी नौकरी में होने की वजह से वह सार्वजनिक रूप से पति के प्रचार में शामिल तो नहीं हो रहीं लेकिन घर की चहारदीवारी में उन्होंने मोर्चा संभाल रखा है। 
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सोलन सीट में विधानसभा चुनाव रिश्तों को सियासी तराजू में तौल रहा है। दो विचारधाराओं की लड़ाई ने एक ही परिवार को अलग-अलग मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यह सूबे की एकमात्र सीट है, जहां प्रचार आरोपों-प्रत्यारोपों या लांछन की राजनीति पर नहीं हो रहा है।

उधर, शिमला जिले की कसुम्पटी सीट में भी मुख्यमंत्री की पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह अपनी भाभी ज्योति सेन के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रही हैं। ज्योति हाल ही में कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

फौजी हूं, मिशन पूरा करूंगा : कर्नल शांडिल

The son-in-law and the father-in-law from the Solan seat are face-to-face

कर्नल धनी राम शांडिल का कहना है कि वह फौजी हैं और उन्हें जो मिशन पार्टी हाईकमान ने दिया है उसे पूरा करने के अलावा उन्हें कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। लोग इस लड़ाई को ससुर और दामाद के बीच न लेकर विचारधारा की लड़ाई के रूप में देखें।

यहां सिर्फ दो अलग-अलग विचारधारा हैं, जिनमें से लोगों को एक का चुुनाव करना है। वह पूरी शिद्दत के साथ विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं और आखिरी समय तक जीत के लिए पूरा जोर लगाएंगे।

भाजपा और कांग्रेस में है मुकाबला : डॉ. राजेश कश्यप
डॉ. राजेश कश्यप का कहना है कि सोलन में ससुर-दामाद का मुकाबला नहीं है। भाजपा और कांग्रेस का मुकाबला है। कांग्रेस ने पांच साल क्या किया और क्या छूट गया है, उसकी लड़ाई है। सोलन के विकास की बात लेकर वे लोगों के बीच जा रहे हैं। लोग उनकी बात सुन रहे हैं और पांच साल का आकलन कर रहे हैं। उनके सामने कोई भी हो, वह पार्टी प्रत्याशी के रूप में इस विधानसभा चुनाव में उतरे हैं।

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