फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   The mountain lifestyle and diet are amazing, keeping your memory intact in old age.

Shimla News: पहाड़ी जीवनशैली और खानपान का कमाल, बुढ़ापे में याददाश्त बरकरार

Tue, 05 May 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
The mountain lifestyle and diet are amazing, keeping your memory intact in old age.
अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
विज्ञापन

स्वास्थ्य और जिला कल्याण विभाग की ओर से शिमला के ग्रामीण इलाकों में किए सर्वेक्षण में खुलासा
सिर्फ एक फीसदी में मिली माइल्ड डिमेंशिया की शिकायत
अशोक चौहान
शिमला। पहाड़ी क्षेत्रों की जीवनशैली और खानपान की आदतों से बढ़ापे आने के बावजूद गांव के बुजुर्गाें की याददाश्त तेज है। 80 साल से ज्यादा की उम्र होने पर भी पहाड़ी क्षेत्र के बुजुर्गाें में भूलने की बीमारी बेहद कम है। शिमला जिले के ग्रामीण इलाकों में किए जांच सर्वेक्षण में इसका चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

केंद्र सरकार की योजना के तहत जिला कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर ग्रामीण बुजुर्गाें की मानसिक सेहत जांचने के लिए मार्च में यह जांच सर्वेक्षण किया है। यह सर्वेक्षण शिमला जिला के छौहारा विकास खंड के चिड़गांव और कुपवी क्षेत्र में किया गया। जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा की अध्यक्षता में लगे शिविर में किए इस सर्वेक्षण यानि डिमेंशिया स्क्रीनिंग में 60 से लेकर 80 साल तक के 338 बुजुर्गाें के मानसिक स्वास्थ्य की जांच की गई। इसमें चिड़गांव के 291 और कुपवी के 47 बुजुर्ग शामिल थे। डॉक्टरों के अनुसार इसमें सिर्फ चार बुजुर्गाें में ही माइल्ड डिमेंशिया यानि भूलने की बीमारी पाई गई। बाकी सभी की याददाश्त ठीक निकली। स्क्रीनिंग में बुजुर्गाें की याददाश्त जानने को लेकर कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं। आमतौर पर वृद्धावस्था में लोग बातें भूलने लगते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि यह वृद्धावस्था का असर है लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी है जिसका उपचार हो सकता है। केंद्र की योजना का मकसद भी यही है कि बुजुर्गाें की इस समस्या का समय पर पता लगाया जाए ताकि उपचार संभव हो। जांच में जिन चार बुजुर्गाें में माइल्ड डिमेंशिया की शिकायत मिली हैं, उनके परिजनों को उपचार के लिए भी जानकारी दी है।
विज्ञापन




सामाजिक जुड़ाव से मानसिक सेहत बनी लाजवाब
डॉक्टरों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा चलने फिरने, शारीरिक गतिविधियां ज्यादा होने, संतुलित आहार, शुद्ध वातावरण मिलने से बुजुर्गाें की मानसिक सेहत ठीक रहती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जुड़ाव भी बना रहता है। कम तनाव और शोर शराबे से दूर होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों के बुजुर्गाें में भूलने की बीमारी कम है। जांच में 80 से ज्यादा उम्र के ज्यादातर बुजुर्गाें में भी डिमेंशिया की शिकायत न के बराबर पाई गई जिससे डॉक्टर भी हैरान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन





कोटआईजीएमसी में साइकोलॉजी विभाग के डॉ. युवराज कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र में लोगों का लाइफस्टाइल बेहतर है। यहां चलना फिरना, योगा प्राणायाम और खानपान की आदतें अच्छी हैं जिससे बुजुर्गाें की याददाश्त ठीक है। साथ ही बुजुर्ग तंदरुस्त भी रहते हैं और लंबे समय तक काम करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article