चुनाव आयोग की अधूरी तैयारी का फायदा उठा रहे सोशल मीडिया के 'शेर'
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चुनाव आयोग के पास ठोस मैकेनिज्म न होने का फायदा सोशल मीडिया के 'नेता जी' उठा रहे हैं। आयोग ने सोशल मीडिया पर नकेल कसने के लिए फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों से संपर्क किया है, ताकि दलों तथा नेताओं के प्रचार-प्रसार को उनके खर्च के साथ जोड़ा जा सके।
इसी बीच पार्टियों और नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिये प्रचार वॉर शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के नेता ट्विटर और फेसबुक पर ट्वीट और पोस्ट अपडेट कर बिना आयोग की मंजूरी के अपनी बात लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
सोमवार को आचार संहिता लागू होने के पहले ही दिन आयोग के सोशल मीडिया पर निगरानी के दावों की राजनेताओं ने हवा निकाल दी। भाजपा नेताओं की ओर से सुबह से ही फिर एक बार मोदी सरकार हैश टैग के साथ ट्वीट किए जाने लगे।
हैश टैग से प्रचार वॉर शुरू कर दिया
जवाब में कांग्रेस नेताओं ने भी डीमॉनेटाइजेशन याद रखना हैश टैग से प्रचार वॉर शुरू कर दिया। दोनों पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता दिनभर इन दोनों हैशटैग का इस्तेमाल कर ट्वीट कर ट्रेंड लिस्ट के टॉप पर आने के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन शाम तक फिर एक बार मोदी सरकार टॉप पर ट्रेंड करता रहा।
सूत्रों के अनुसार आयोग ने सोशल मीडिया कंपनियों से दोनों ही माध्यमों के जरिये प्रचार के लिए किए जाने वाले विज्ञापन तथा पोस्ट बूस्ट की जानकारी तो हासिल करने के लिए संपर्क किया है, लेकिन ट्वीट के जरिये प्रचार के तरीके पर कोई नकेल कसने की रणनीति के सामने आयोग बेबस नजर आया।
हिमाचल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी देवेश कुमार से इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। कहा कि अगर शिकायत मिलती है तो उसको रिव्यू कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
जाहिर है जब सोशल मीडिया की निगरानी के लिए आयोग के पास तंत्र ही नहीं है तो वह कैसे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले को पकड़ेगा और कैसे वह कार्रवाई करेगा, यह बड़ा सवाल है।