शिमला में 10 साल पहले आ गई थी पहली इलेक्ट्रिक कार, पढ़ें पूरा मामला
शिमला में पहली इलेक्ट्रिक कार दस साल पहले आ गई थी। तिब्बती युवा तेंजिग संगरप ने यह कार सबसे पहले लाई थी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। सीएम जयराम ठाकुर इन दिनों सचिवालय जाने के लिए इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल कर रहे हैं। तेंजिंग संगरप ने ईंधन रहित इलेक्ट्रिक कार में सफर कर जागरूकता का संदेश देने के लिए उन्हें बधाई दी।
49 साल के तेंजिग संगरप की माल रोड शिमला पर लिफ्ट की बाईं ओर यूएस क्लब से नीचे हिमाचली हैंडलूम और तिब्बती वस्तुओें की दुकान है। तेंजिग कहते हैं कि वर्ष 2009 में उन्होंने यह कार चंडीगढ़ से साढे़ तीन लाख रुपये में खरीदी थी। इस कार को बनाने वाली कंपनी को अब देश की एक बड़ी कार कंपनी ने खरीद लिया है। उन्होंने यह कार वर्ष 2009 से 2014 के बीच करीब पांच साल चलाई।
वह इसे प्रदेश उच्च न्यायालय के साथ की एक पार्किंग में खड़ा करते, यहीं चार्ज करते। वर्ष 2014 में यहां भूस्खलन होने के बाद कार ले जाना मुश्किल हो गया। फिर यहां इसे चार्ज करने की समस्या आडे़ आई। वर्ष 2014 में अपने एक रिश्तेदार के पास नई दिल्ली भेज दी। अब यह वहां चल रही है। तेंजिन संगरप ने बताया कि इस कार में वह अपनी तीनों बेटियों, पत्नी, पत्नी की सहेलियों को बच्चों सहित इस कार में बैठाकर स्कूल ले जाते थे।
एक बार इस कार में आठ लोग बैठे थे तो लोग उनके बाहर निकलते समय हैरान हो गए कि इसमें इतने लोग आ कहां से गए। चढ़ाई में भी यह कार ठीक से चलती थी। बस बैटरी ज्यादा खाती थी, उतराई में चलने पर इस कार से बैटरी चार्ज होती थी। इसमें चार्ज करने के उपकरण लगे थे। लोग बड़े अचरज से इस छोटी सी कार को चलते हुए देखते थे।
दोबारा से इलेक्ट्रिक कार लेने का विचार
तेंजिन संगरप ने कहा कि उनका दोबारा से इलेक्ट्रिक कार लेने का विचार है। अब तो और भी हाईटेक कारें आ गई हैं। शिमला में चार्जिंग की समस्या है। सरकार को पहले चार्जिंग स्टेशन बनाने चाहिए, जिससे आम लोग भी इसके लिए प्रोत्साहित हों।
प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक कार का दावा
तेंजिन संगरप दावा करते हैं कि यह कार हिमाचल प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक कार थी। आरटीओ कार्यालय में पंजीकरण के दौरान उन्हें इस तरह की जानकारी मिली थी।