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Shimla News: जिला आयोग का फैसला निरस्त, पीड़ित को मिलेगा 1.79 लाख रुपये मुआवजा

Thu, 24 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 11:59 PM IST
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The District Commission's decision was set aside, and the victim would receive compensation of Rs 1.79 lakh.
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया फैसला, मंडी के औट में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था वाहन
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जिला आयोग ने गलत नाम दर्ज होने पर खारिज किया था क्लेम
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन दुर्घटना बीमा दावे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग मंडी के आदेश को निरस्त कर दिया है।

राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1.79 लाख रुपये का बीमा दावा नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसके अतिरिक्त, मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मंडी निवासी भोले राम ने अपने वाहन का 2 लाख रुपये में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। वाहन 18 दिसंबर 2020 को मंडी जिले के औट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे की रिपोर्ट औट थाने में दर्ज कराई गई, जहां एफआईआर में भूलवश चालक का नाम ओम प्रकाश लिख दिया गया।
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हालांकि पुलिस जांच के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत पेश की अंतिम चार्जशीट में स्पष्ट हुआ कि हादसे के समय वाहन ओम चंद चला रहा था। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने 1.79 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया था। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 24 जनवरी 2022 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि एफआईआर में दर्ज चालक ओम प्रकाश के पास केवल लर्नर लाइसेंस था और उसके साथ कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग मंडी ने भी 27 जुलाई 2024 को भोले राम की शिकायत खारिज कर दी, जिसके खिलाफ उन्होंने राज्य आयोग में अपील दायर की।
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राज्य आयोग की टिप्पणी और फैसला
मामले के रिकॉर्ड और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद राज्य आयोग ने पाया कि पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, मंडी के रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि दुर्घटना के समय वाहन वास्तव में ओमचंद ही चला रहा था। चालक ओमचंद के पास 30 मई 2016 से 9 अक्तूबर 2029 तक का वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। एफआईआर में दर्ज शुरुआती त्रुटिपूर्ण नाम के आधार पर वास्तविक क्लेम को खारिज करना सेवा में कोताही है।
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