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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   The death of two mad dogs, the risk of spreading rabies.

दो पागल कुत्तों की मौत, रैबीज फैलने का खतरा

Tue, 14 Apr 2015 09:49 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 14 Apr 2015 09:49 AM IST
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The death of two mad dogs, the risk of spreading rabies.

राजधानी में लोगों को काटकर घायल करने वाले दो कुत्तों की मौत हो गई है। दोनों कुत्तों में से एक की मौत का कारण रैबीज तथा दूसरे की मौत पागल कुत्ते के काटने से बताई है। दूसरा कुत्ता भी पागल हो गया था।

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आठ अप्रैल को नगर निगम ने कसुम्पटी में इन दोनों कुत्तों को पकड़ा था। कुत्तों को पकड़कर ओल्ड बैरियर स्थित नगर निगम के डॉग स्टेरेलाइजेशन सेंटर में रखा गया। जांच के दौरान एक कुता रैबीज से ग्रसित पाया गया था।
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कसुम्पटी के गोविंद लॉज के आसपास कुत्तों द्वारा काटे जाने की शिकायत आई थीं। इसके बाद नगर निगम ने क्षेत्र में अभियान चलाकर तीन कुत्तों को पकड़ा था।

इन तीन कुत्तों में से दो की सोमवार को मौत हो गई है। लोगों को काटने वाले इन दो कुत्तों की मौत से शहर में दहशत है। कुत्तों के काटने से गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को अब जिला सोलन के कसौली स्थित सीआरआई में जांच करवानी पड़ेगी।
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घायल हुए लोगों के शरीर पर गंभीर घाव हैं और नसों को काटा है या फिर नाक, कान, गले, सिर में घाव हैं तो मामला गंभीर है। ऐसे मरीजों को कसौली सीआरआई में एंटी सिरिम के इंजेक्शन लगाने पड़ेंगे।

एक सप्ताह में 45 लोगों को काट चुके हैं कुत्ते

The death of two mad dogs, the risk of spreading rabies.

बीते एक सप्ताह के दौरान कुल 45 लोग कुत्तों के काटने से घायल हो चुके हैं। 7 अप्रैल से शहर में कुत्तों के काटने का सिलसिला शुरू हुआ।

कसुम्पटी, छोटा शिमला से शुरू हुए कुत्ते के काटने के मामले अब अन्य उपनगरों से भी सामने आ रहे हैं। कसुम्पटी, छोटा शिमला, ब्राकहास्ट, विकासनगर, शोघी, खलीनी, कुफ्टाधार, माल रोड, बैम्लोई, कृष्णानगर, नाभा, लालपानी, ओल्ड बस स्टेंड, सब्जी मंडी, गंज बाजार, टुटीकंडी और कैथू में कुत्तों के काटने से घायल लोग उपचार के लिए रिपन अस्पताल पहुंचे हैं।

बीपीएचओ ब्रांच के डा. हमिंद्र शर्मा ने ओल्ड बैरियर सेंटर में दो कुत्तों के मरने की पुष्टि की है। एक कुत्ते मंे रैबीज तथा दूसरे कुत्ते की मौत पागल कुत्ते के काटने से हुई है।

रैबीज रोग के ये हैं लक्षण

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रैबीज रोग का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आरंभ में सिर दर्द शुरू होता है। गले में खराश, हल्का बुखार और घबराहट महसूस होती है। रोगी का स्वभाव चिड़चिड़ा होना शुरू हो जाता है।

बाद में रोगी पानी को देखना भी सहन नहीं कर पाता। इसी स्थिति को हाइड्रो फोबिया कहते हैं। रोगियों की मृत्यु का कारण श्वसन तंत्र की मांसपेशियों में ऐंठन होती है। इस तरह रोगी प्यासा ही मर जाता है।

सोमवार को माल रोड, बेम्लोई, कृष्णानगर, नाभा, शोघी और लालपानी में छह लोगों को कुत्तों ने काटा है। सभी लोगों को रिपन अस्पताल में उपचार दिया गया।

मरीजों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए हैं। रिपन अस्पताल के एमएस डा. पीएल गौंटा ने बताया कि सभी मरीजों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। सोमवार को छह नए मामले सामने आए हैं।

1916 दें काटने वाले कुत्तों की जानकारी

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एमसी के सहायक आयुक्त प्रशांत सरकेक ने कहा कि हम रिपन अस्पताल के निरंतर संपर्क में हैं। कुत्तों के काटने की सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्रों में जाकर अभियान चलाया जा रहा है।

सहायक आयुक्त ने शहरवासियों से नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0177 1916 पर काटने वाले कुत्तों की शिकायत करने की अपील की है। सोमवार को घोड़ा चौकी, कसुम्पटी और विकासनगर में अभियान चलाया गया।

घाव को तुरंत साफ करना चाहिए। साफ करने को सिटावलान अथवा बेनएल्कोनियम क्लोराइड घोल टिटनेस का टीका लगवाना चाहिए। काटने वाले जानवर पर 10 दिन नजर रखनी चाहिए। यदि जानवर मर जाता है तो इस अवस्था में तुरंत उपचार आरंभ कर देना चाहिए। एंटी रेबीज वैक्सीन ही इस रोग का उपचार है।

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