किन्नर कैलाश यात्रा शुरू, 450 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना
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दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शुमार 10 दिवसीय किन्नर कैलाश यात्रा वीरवार से शुरू हो गई। पहले दिन 450 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवाया। जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच जत्थे को रवाना किया।
करीब 24000 फीट की ऊंचाई पर प्राकृतिक रूप से स्थापित शिवलिंग तक पहुंचने में तीन दिन लगते हैं। यात्रा शुरू होने से पहले दो श्रद्धालु तांगलिंग के पास नाले में बह चुके हैं। करीब 300 श्रद्धालुओं को सेना और आईटीबीपी की मदद से रेस्क्यू भी करना पड़ा था।
अब प्रशासन मौसम की नजाकत को देखते श्रद्धालुओं को यात्रा पर भेजेगा। अगर मौसम खराब हुआ तो तुरंत यात्रा रोक दी जाएगी। रात में यात्रा करने की किसी को इजाजत नहीं होगी।
2000 मीटर की ऊंचाई से शुरू होकर यात्रा 5445 मीटर की चोटी पर खत्म होती है। करीब 14 किलोमीटर का पथरीला और अति दुर्गम रास्ता पार करना पड़ता है। पवित्र यात्रा 11 अगस्त तक चलेगी।
किन्नर कैलाश यात्रा का बेसकैंप पोवारी में बनाया
किन्नर कैलाश यात्रा का बेसकैंप पोवारी में बनाया गया है। यहां पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच के बाद श्रद्धालु चार दिन की यात्रा कर वापस पहुंचते हैं। पोवारी से सुबह सात बजे के बाद से जत्थों की रवानगी हो रही है और रात्रि ठहराव गणेश पार्क में होगा।
दूसरे दिन गणेश पार्क से गणेश गुफा तक ठहराव होगा। यहां श्रद्धालु पार्वती कुंड के दर्शन कर सकते हैं। मान्यता है इस कुंड में सिक्का डालने से मांगी मुराद पूरी हो जाती है। तीसरे दिन गुफा से किन्नर कैलाश स्थित शिवलिंग तक पहुंचते हैं।
चौथे दिन वापस बेस कैंप पहुंचते हैं। मौसम साफ रहने पर सूरज की रोशनी पड़ने से शिवलिंग दिन में सात बार रंग बदलता हैं। बेस कैंप में श्रद्धालुओं के खाने-पीने का प्रबंध भी किया गया है।
जड़ी-बूटियों और ब्रह्म कमल को नुकसान न पहुंचाएं
कार्यवाहक उपायुक्त किन्नौर एवं एसडीएम कल्पा डॉ. मेजर अवनिंद्र शर्मा ने बताया कि यात्रा शुरू हो गई है। श्रद्धालुओं को हिदायत दे रहे हैं कि यात्रा के दौरान बहुमूल्य जड़ी-बूटियों और ब्रह्म कमल को नुकसान न पहुंचाए।
बेस कैंप पोवारी में पंजीकरण अनिवार्य है। प्रशासन के तरफ से सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच के लिए पुलिस, होमगार्ड और स्वास्थ्य दल तैनात रहेंगे। अगर मौसम खराब हुई तो बीच में रोक दिया जाएगा।