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Shimla News: वेतन में देरी पर अध्यापकों और कर्मचारियों का धरना
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एचपीयू में कुलपति कार्यालय के बाहर जताया रोष, हर माह पहली तारीख को वेतन देने की उठाई मांग
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने नहीं किया शिक्षण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला के शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों ने हर माह की पहली तारीख को वेतन देने की मांग की है। इस मांग को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को कुलपति कार्यालय के बाहर गेट मीटिंग की और धरना दिया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) और गैर शिक्षक संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने सोमवार को कक्षाओं में शिक्षण कार्य भी बंद रखा। हालांकि विवि के करीब 1500 कर्मचारियों को सोमवार को अप्रैल माह का वेतन मिल गया है। लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर माह वेतन पहली तारीख को ही मिले। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों और शिक्षकों ने विवि प्रशासन तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार दो माह से कर्मचारियों को वेतन के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इस देरी के लिए प्रदेश सरकार की विवि को वेतन के लिए जारी होनेे वाले सहायता अनुदान को तीन माह में एक साथ की जगह हर माह जारी करने की नई व्यवस्था जिम्मेदार है। हर माह विवि के वित्त अधिकारी और विवि के अधिकारियों को अपने कर्मचारियों के वेतन के लिए अनुदान को सचिवालय में जाकर गुहार लगानी पड़ रही है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय स्टेट यूनिवर्सिटी है और यहां के शिक्षक गैर शिक्षक कर्मचारियों के वेतन की अदायगी की प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति और स्थायी कुलसचिव न होना भी इस देरी का कारण है। विश्वविद्यालय में जरूरी फाइलें समय से साइन नहीं हो पा रही हैं, इससे विवि का कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों का सोमवार को ही वेतन खातों में आ गया था। कहा कि हर माह पेश आने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार से बात की जाएगी।
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धरने में डॉ. अंकुश, डॉ. अंजलि, डॉ. राम, डॉ. गौरव, डॉ. अनिल, डॉ. जोगिंद्र सकलानी, डॉ. शिव डोगरा, डॉ. शशिकांत, डॉ. कनिका, डॉ. रीतिका, डॉ. सुशीला, डॉ. भारती, डॉ. सुरेंद्र , डॉ. अर्पिता, डॉ. सीमा, डॉ. अनुपम, डॉ. मृदुला, डॉ. मीना, डॉ. सुनील, डॉ. अजय सूद, डॉ. अशोक बंसल, डॉ. नवीन, डॉ. धीरज रावत, प्रो. दुनीचंद, प्रो. शिव डोगर, प्रो. उमेश, डॉ. सीमा, प्रो. चंद्रमोहन, प्रो. शशिकांत शर्मा, प्रो. अरुण, डॉ. सनी, डॉ. तनुज, डॉ. टेक कपूर, डॉ. पल्लवी, राजेश, सुनील इसी कोर्ट सदस्य, राज कुमारी और धर्मपाल आदि शामिल हुए।
वेतन देरी के लिए शिक्षा सचिव, निदेशक जिम्मेवार : डॉ. नीतिन
शिक्षक संघ हपुटवा के अध्यक्ष डाॅ. नीतिन व्यास ने लगातार वेतन भुगतान में हो रही देरी के लिए शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन दोनों अधिकारियों के कार्यालय से विवि कर्मचारियों के मासिक वेतन की फाइल समय से साइन नहीं हुई। यह उनकी असंवेदनशीलता को दर्शाता है। 10 दिन तक शिक्षा सचिव के टेबल पर फाइल साइन होने के लिए पड़ी रही। कहा कि फाइल साइन करने में देरी क्यों हुई इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षकों को सीएएस के तहत पदोन्नति देने, कर्मचारियों को 2016 स्केल का एरियर देने, पूरा डीए देने की मांग भी उठाई।
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प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने नहीं किया शिक्षण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला के शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों ने हर माह की पहली तारीख को वेतन देने की मांग की है। इस मांग को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को कुलपति कार्यालय के बाहर गेट मीटिंग की और धरना दिया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) और गैर शिक्षक संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने सोमवार को कक्षाओं में शिक्षण कार्य भी बंद रखा। हालांकि विवि के करीब 1500 कर्मचारियों को सोमवार को अप्रैल माह का वेतन मिल गया है। लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर माह वेतन पहली तारीख को ही मिले। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों और शिक्षकों ने विवि प्रशासन तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार दो माह से कर्मचारियों को वेतन के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इस देरी के लिए प्रदेश सरकार की विवि को वेतन के लिए जारी होनेे वाले सहायता अनुदान को तीन माह में एक साथ की जगह हर माह जारी करने की नई व्यवस्था जिम्मेदार है। हर माह विवि के वित्त अधिकारी और विवि के अधिकारियों को अपने कर्मचारियों के वेतन के लिए अनुदान को सचिवालय में जाकर गुहार लगानी पड़ रही है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय स्टेट यूनिवर्सिटी है और यहां के शिक्षक गैर शिक्षक कर्मचारियों के वेतन की अदायगी की प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति और स्थायी कुलसचिव न होना भी इस देरी का कारण है। विश्वविद्यालय में जरूरी फाइलें समय से साइन नहीं हो पा रही हैं, इससे विवि का कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों का सोमवार को ही वेतन खातों में आ गया था। कहा कि हर माह पेश आने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार से बात की जाएगी।
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धरने में डॉ. अंकुश, डॉ. अंजलि, डॉ. राम, डॉ. गौरव, डॉ. अनिल, डॉ. जोगिंद्र सकलानी, डॉ. शिव डोगरा, डॉ. शशिकांत, डॉ. कनिका, डॉ. रीतिका, डॉ. सुशीला, डॉ. भारती, डॉ. सुरेंद्र , डॉ. अर्पिता, डॉ. सीमा, डॉ. अनुपम, डॉ. मृदुला, डॉ. मीना, डॉ. सुनील, डॉ. अजय सूद, डॉ. अशोक बंसल, डॉ. नवीन, डॉ. धीरज रावत, प्रो. दुनीचंद, प्रो. शिव डोगर, प्रो. उमेश, डॉ. सीमा, प्रो. चंद्रमोहन, प्रो. शशिकांत शर्मा, प्रो. अरुण, डॉ. सनी, डॉ. तनुज, डॉ. टेक कपूर, डॉ. पल्लवी, राजेश, सुनील इसी कोर्ट सदस्य, राज कुमारी और धर्मपाल आदि शामिल हुए।
वेतन देरी के लिए शिक्षा सचिव, निदेशक जिम्मेवार : डॉ. नीतिन
शिक्षक संघ हपुटवा के अध्यक्ष डाॅ. नीतिन व्यास ने लगातार वेतन भुगतान में हो रही देरी के लिए शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन दोनों अधिकारियों के कार्यालय से विवि कर्मचारियों के मासिक वेतन की फाइल समय से साइन नहीं हुई। यह उनकी असंवेदनशीलता को दर्शाता है। 10 दिन तक शिक्षा सचिव के टेबल पर फाइल साइन होने के लिए पड़ी रही। कहा कि फाइल साइन करने में देरी क्यों हुई इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षकों को सीएएस के तहत पदोन्नति देने, कर्मचारियों को 2016 स्केल का एरियर देने, पूरा डीए देने की मांग भी उठाई।