बेटियों के लिए तोड़ी 500 साल पुरानी परंपरा, हिम्मत जुटाकर गुफा तक पहुंची अंजू
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करीब 500 साल पुरानी परंपरा को तोड़ उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर की पवित्र गुफा तक अंजू बाला को बेटियों की जिद्द ले गई। लदरौर स्कूल में शिक्षिका अंजू की दो बेटियां हैं। चौदह साल की सलोनी और आठ साल की विद्याना।
दोनों मां के साथ जब भी मंदिर जातीं तो सवाल पूछतीं - मां, हम चबूतरे से बाबा के दर्शन क्यों करती हैं? गुफा में क्यों नहीं जातीं। मां के पास जवाब न होता तो बड़े-बुजुर्ग बच्चियों को बताते- एक बार कोई महिला गुफा तक पहुंच गई थी, जिसकी सीढ़ियों से गिरकर मौत हो गई।
मासूम बच्चियां इस पर मां से पूछती - भगवान तो सबके रक्षक हैं, वे भला किसी को कैसे गिरा सकते हैं। इन सवालों का मां के पास कोई जवाब न होता। बीते दिनों मीडिया में मामला सामने आया तो अंजू ने हिम्मत की और अपनी दोनों बेटियों को लेकर बाबा के दर्शन के लिए गुफा तक पहुंच गईं।
अंजू ने कहा कि भगवान केवल पुरुषों के ही शुभचिंतक नहीं
मंदिर में बाबा के दर्शन किए और पुजारी से प्रसाद लेकर घर लौट आईं। अमर उजाला से बातचीत में अंजू ने बताया कि उनके घर भोटा में हैं। यहां से बाबा का मंदिर दूर नहीं। लिहाजा, सलोनी जब चार साल की थी, उसी समय से वह महीने में एक बार मंदिर जरूर जाती हैं।
अंजू ने कहा कि भगवान केवल पुरुषों के ही शुभचिंतक नहीं हैं। ईश्वर के लिए सभी एक हैं। फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष। उनका मकसद किसी की भावनाओं और मान्यताओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। वह किसी पर कोई टिप्पणी भी नहीं करना चाहती हैं।
हालांकि, एक सवाल के जवाब में अंजू ने कहा कि बाबा बालक नाथ मंदिर के महंत राजेंद्र गिरी और ट्रस्टियों समेत वह उन सभी लोगों का भी सम्मान करती हैं, जो महिलाओं का विरोध कर रहे हैं।