पैसों की खातिर लोगों को खिला दी कपड़े के रंग से रंगी मिठाई
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पैसा कमाने के लिए शिमला के कुछ दुकानदारों ने लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर डाला। दिवाली पर कपड़े के रंग में रंगी मिठाइयां जमकर बेची गई। इनके सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दीवाली से पहले शोघी की छह दुकानों से लिए मिठाई के सैंपल सही नहीं पाए गए हैं। इस मामले में सभी छह दुकानदारों को नोटिस जारी कर 30 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य महकमे ने शोघी से चमचम, डोडा बर्फी, कलाकंद, पतीसा, खोया बर्फी और बेसन बर्फी के सैंपल भरे थे। इनमें चमचम में अनपरमिटिड कलर, पतीसा में मिस ब्रांड, कलाकंद, डोडा बर्फी, खोया बफी और बेसन बर्फी में धूल मिट्टी के कण पाए गए हैं। रिपोर्ट के बाद साफ है कि इनमें से कोई भी मिठाई खाने लायक नहीं थी।
महीने बाद आई रिपोर्ट पर भी सवाल
स्वास्थ्य महकमे की टीम ने दीवाली के दौरान कई जगहों से मिठाइयों के सैंपल लिए थे। दीवाली में मिठाइयों की सबसे ज्यादा बिक्री होती है। इस दौरान कुछ दुकानदार ज्यादा मुनाफे के चक्कर में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर मिठाईयां बनाते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होती है।
इस स्थिति में जब महकमे की टीम मौके पर सैंपल लेने के लिए पहुंचती है तो यह बता पाना काफी मुश्किल रहता है कि कौन सी मिठाई खाने लायक नहीं है। विभागीय टीम को जिस मिठाई पर उन्हें संदेह होता है उसका सैंपल ले लिया जाता है। हालांकि उसी समय मिठाई को कब्जे में नहीं लिया जाता।
इस स्थिति में मुश्किल यह है कि जब तक रिपोर्ट आती है तब तक वह मिठाई बिक जाती है अगर मिठाई का सैंपल ठीक निकला तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन अगर सैंपल रिपोर्ट फेल होती है तो उस मिठाई के खरीददारों की सेहत से सीधा खिलवाड़ हो जाता है। अभी तक ऐसी कोई तकनीक स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है जिसमें मौके पर ही मिठाईयों के सैंपल की जांच हो जाए और उसी समय रिपोर्ट भी सामने आ जाए।
दुकानदारों से मांगा है जवाब
स्वास्थ्य महकमे के फूड एंड सेफ्टी एक्ट के डेजगेनेटिड आफिसर एलडी ठाकुर ने कहा कि शोघी से छह मिठाइयों की दुकानों से सैंपल लिए हैं। इसकी रिपोर्ट आ गई है। सभी मिठाइयां खाने लायक नहीं थी। इस बारे में सभी छह दुकानदारों को नोटिस जारी कर 30 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।