सुषमा ने आगे किया था मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में धूमल का नाम
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पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज का पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ घनिष्ठ संबंध रहा। बतौर मुख्यमंत्री दो बार हिमाचल का नेतृत्व करने वाले प्रेम कुमार धूमल का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पहले सुषमा स्वराज ने ही पार्टी नेताओं के सामने रखा था।
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर को वह अपना संकट मोचक मानती थीं। धूमल कहते हैं कि जब वह प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष थे, तब सुषमा स्वराज हिमाचल प्रदेश की प्रभारी थीं। प्रभारी के तौर पर वह कार्यकर्ताओं को हमेशा प्रोत्साहित करती रहीं।
प्रदेश अध्यक्ष रहते धूमल ने हिमाचल प्रभारी सुषमा के साथ मिलकर प्रदेश में संगठन को खड़ा किया। केंद्र में मंत्री रहते भी हिमाचल के हितों का हमेशा ख्याल रखा। धूमल ने कहा कि वर्ष 2007 में उन्हें हमीरपुर उपचुनाव लड़ने को कहा गया।
तो आप मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे
यहां तक कहा गया कि जब विस के चुनाव होंगे तो आप मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे। विस चुनाव से पहले वह सुषमा से मिलने घर गए। मुलाकात के बाद घर से बाहर गाड़ी तक छोड़ने आईं।
उन्होंने कहा था ‘आज तो गाड़ी में बैठा रही हूं, इसके बाद शिमला में मुख्यमंत्री की गाड़ी में बैठे देखना चाहती हूं।’ बाद में जब अनुराग सांसद बने तो वह नेता प्रतिपक्ष थीं। फोन पर कहा ‘अनुराग मेरा संकट मोचक है।’
सुषमा हर नए सांसद को मां की ममता के रूप में बच्चे के तौर पर आगे बढ़ाती थीं। धूमल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने सुषमा स्वराज के रूप में एक महत्वपूर्ण नेता खोया है। सुषमा स्वराज सर्वमान्य नेता थीं।
धूमल ने बताया कि 1989 में वह पहली बार सांसद बने तो 1990 में सुषमा स्वराज पहली बार राज्यसभा में चुनकर आई थीं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब पार्टी ने एक कमेटी गठित की, जिसकी अध्यक्षता सुषमा स्वराज ने की थी।
उन्हीं की अनुशंसा पर पार्टी में महिलाओं को 33 फीसदी पद पदाधिकारियों के रूप में मिलना शुरू हुए। धूमल ने कहा कि राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध रहे।