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Shimla: सुरेश कश्यप- भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता चरम पर, कांग्रेस सरकार पूरी तरह बेनकाब

Tue, 13 Jan 2026 05:21 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Jan 2026 05:21 PM IST
सार

सुरेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में न तो जनता के धन की सुरक्षा हो पा रही है और न ही प्रशासनिक मर्यादा और अनुशासन कायम रह पा रहा है।

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Suresh Kashyap- Corruption and administrative chaos at its peak, Congress govt completely exposed
सांसद सुरेश कश्यप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने हिमाचल प्रदेश में सामने आ रहे गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों और प्रशासनिक अराजकता पर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश आज कुशासन, भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षित तंत्र के दौर से गुजर रहा है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में न तो जनता के धन की सुरक्षा हो पा रही है और न ही प्रशासनिक मर्यादा और अनुशासन कायम रह पा रहा है। सुरेश कश्यप ने कहा कि जल शक्ति विभाग में वर्ष 2024–25 के दौरान 36.77 करोड़ की लागत से 4,770 मीट्रिक टन जीआई पाइप की खरीद में जिस तरह की गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, वे कांग्रेस सरकार की कथित पारदर्शिता की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरी आपूर्ति प्रक्रिया में निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन हुआ। भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि जब इतने गंभीर तथ्य सरकार की स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज हैं, तो अब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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कार्रवाई नहीं, केवल दिखावटी कदम
सुरेश कश्यप ने कहा कि दबाव में आकर विभाग की ओर से कंपनी की लगभग 22 करोड़ की पेमेंट रोकना कोई बड़ी कार्रवाई नहीं है। असली सवाल यह है कि इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कब कार्रवाई होगी। यदि भाजपा इस मुद्दे को लगातार न उठाती, तो यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबा दिया जाता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती और बचाव की राजनीति कर रही है।

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प्रशासनिक अराजकता और बेलगाम बयानबाजी
भाजपा सांसद ने कहा कि भ्रष्टाचार के साथ प्रदेश में प्रशासनिक अनुशासन भी पूरी तरह ढह चुका है। हाल के दिनों में सत्ता के संरक्षण में दिए जा रहे विवादित बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुछ अधिकारी और मंत्री स्वयं को संविधान, सेवा नियमों और मर्यादा से ऊपर समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है, जहां हमेशा प्रशासन ने निष्पक्षता, संतुलन और सेवा भाव के साथ काम किया है, लेकिन कांग्रेस शासन में क्षेत्रीय भावनाएं भड़काने, समाज को बांटने और प्रशासन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिशें हो रही हैं, जो प्रदेश के लिए अत्यंत घातक हैं। उन्होंने कहा कि जब जल शक्ति विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में करोड़ों का घोटाला सामने आए और प्रशासनिक स्तर पर अनुशासनहीनता बढ़े, तब मुख्यमंत्री का मौन रहना सीधी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।

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भाजपा करेगी हर स्तर पर संघर्ष
भाजपा सांसद ने स्पष्ट किया कि भाजपा हिमाचल प्रदेश की जनता के धन, प्रशासनिक गरिमा और प्रदेश की अस्मिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। भाजपा इन मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक और न्यायिक मंचों तक उठाएगी। उन्होंने मांग उठाई कि पाइप खरीद घोटाले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।  प्रशासनिक मर्यादा भंग करने वाले बयानों और कृत्यों पर तत्काल जवाबदेही तय की जाए।  सुरेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, भाजपा हिमाचल में भ्रष्टाचार, अराजकता और कुशासन को उजागर करती रहेगी और जनता के हितों की आवाज पूरी मजबूती से बुलंद करेगी।

विक्रमादित्य का बयान प्रदेश की एकता, प्रशासनिक मर्यादा पर हमला : भारद्वाज
 सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह कि प्रदेश के बाहर से आए प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया पर कि गई टिप्पणियां न केवल सांविधानिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक एकता को भी नुकसान पहुंचाने वाली हैं। हिमाचल प्रदेश देवभूमि है, जहां देश के हर हिस्से से आए अधिकारियों और कर्मचारियों ने समर्पण भाव से सेवा दी है। इस तरह के बयान प्रदेश की सौहार्दपूर्ण परंपरा और छवि को ठेस पहुंचाते हैं। सांसद ने कहा कि आज स्थिति यह है कि मंत्री और अधिकारी खुलेआम गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार की ओर से न तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया आ रही है और न ही कोई सख्त कार्रवाई देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री की यह चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा नुकसान प्रदेश के हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को होगा। डॉ. राजीव भारद्वाज ने मांग की कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले पर तुरंत स्पष्ट और सार्वजनिक रुख अपनाएं, विवादित बयानों पर जवाबदेही तय करें।

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