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Shimla News: निजी स्कूल खोलना आसान नहीं, संचालकों के लिए खेल मैदान के क्षेत्रफल के मानक तय

Fri, 11 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:59 PM IST
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play ground must for schools
प्राइमरी के लिए 500 वर्गमीटर, आठवीं तक के लिए 800 और 12वीं तक के स्कूल के लिए 100 वर्गमीटर खेल मैदान अनिवार्य
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खेल मैदान नहीं तो सरकारी या पंचायत मैदान दिखाने के लिए देने होंगे रेंट या शेयरिंग एग्रीमेंट के दस्तावेज
अनिल पंवार
शिमला। प्रदेश में निजी स्कूल खोलने की पंजीकरण की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूल के पंजीकरण के लिए खेल मैदान को लेकर मानक तय कर दिए हैं। नए मानकों के अनुसार स्कूलों के पंजीकरण के लिए प्रबंधन को अब खेल के मैदान का क्षेत्रफल बताना अनिवार्य किया है। स्कूल शिक्षा निदेशक के आदेश के बाद उपनिदेशकों ने इस संबंध में सभी खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों निजी स्कूल शुरू करने से संबंधित प्रस्तावों की जांच नए मानकों के अनुसार करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार नए नियमों के तहत प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक के स्कूल के लिए कम से कम 500 वर्ग मीटर, प्री-प्राइमरी से आठवीं तक 800 वर्ग मीटर, प्री-प्राइमरी से दसवीं तक 800 वर्ग मीटर और प्री-प्राइमरी से बारहवीं तक के स्कूल के लिए 1000 वर्ग मीटर खेल मैदान जरूरी होगा।

विभाग ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार स्कूल के स्तर के हिसाब से मैदान का न्यूनतम क्षेत्रफल तय कर दिया है। हालांकि शिक्षा विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में जगह के अभाव के चलते निजी संचालकों को इस विकल्प का प्रावधान भी रखा है कि जिन स्कूलों के पास अपना खेल मैदान नहीं होगा। ऐसे स्कूल नजदीकी सरकारी या ग्राम पंचायत के खेल मैदान को किराए या शेयरिंग के आधार पर इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण या जमीन मालिक के साथ बाकायदा किराया या शेयरिंग समझौता के दस्तावेज विभाग को देने होंगे। निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों मिले निर्देशों के बाद जिला शिमला उपनिदेशक निशा भलूनी के कार्यालय से खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को निजी स्कूल शुरू करने से संबंधित प्रस्तावों की जांच नए मानकों के अनुसार करने के निर्देश दिए हैं। निजी स्कूलों के प्रमुखों को भी विभाग ने नए नियमों के अनुसार व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में नए प्रावधानों के बाद निजी स्कूल खोलने वालों के लिए स्कूल भवन, कक्षाओं और अन्य सुविधाओं के साथ खेल मैदान की ठोस व्यवस्था करना भी जरूरी होगा। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन की उपलब्धता को देखते हुए यह शर्त निजी स्कूलों के पंजीकरण में बड़ी भूमिका निभाएगी।
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