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'शिमला की खूबसूरती में दाग अवैध निर्माण'

Thu, 02 Oct 2014 11:35 AM IST
Updated Thu, 02 Oct 2014 11:35 AM IST
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supreme court justice kurien joseph official visit to shimla.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने कहा है कि राजधानी शिमला की खूबसूरती को अवैध निर्माण दाग लगा रहा है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नगर निगम को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। बुधवार को निगम सदन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों से कहा कि जिन लोगों ने विश्वास जताकर सत्ता तक पहुंचाया है, उनकी अनदेखी न करो।

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सिर्फ चुनाव के समय लोगों के बीच न जाएं, हर दो माह में लोगों से बैठके करें। निगम प्रशासन के लिए जो समस्याएं छोटी होती हैं वही किसी परिवार या मुहल्ले के लिए बहुत बड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे में लोगों से परस्पर संपर्क बनाकर रखें। न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने निगम सदन में बेबाक राय देते हुए कहा नियम कानून सभी के लिए बराबर हैं। प्रभावशाली के आगे झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जब 2004 में वह शिमला आए थे तो शहर बहुत खूबसूरत था लेकिन जब 2010 में हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति हुई तो एकाएक शहर में बहुत बदलाव देखा।
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अवैध निर्माण न हो, इसका इंतजाम करना चाहिए न कि बाद में कार्रवाई का इंतजार करना चाहिए। 90 प्रतिशत मामलों में अवैध निर्माण लालच के लिए होता है जरूरत के लिए नहीं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपनी जिम्मेवारी को सही से निभाएं। उन्होंने पार्षदों को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी। कहा कि सोचने का समय आ गया है कि हम शिमला को संवार रहे हैं या बिगाड़ रहे। इस अवसर पर रजिस्ट्रार जनरल सीबी बरोबालिया, जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह, सीजेएम मदन शर्मा और प्रताप ठाकुर सहित कई अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
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नेता बनने के बजाए पब्लिक सर्वेंट बनें
न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को कहा आप स्वयं को नेता न समझें। आप पब्लिक सर्वेंट हैं। लोगों की सेवा करने के लिए आपको चुना है। अफसरशाही भी पब्लिक सर्वेंट है।

ई समाधान प्रणाली विकसित करे एमसी
कुरियन जोसेफ ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध निवारण होना चाहिए। नगर निगम को प्रभावी ई समाधान प्रणाली विकसित करनी चाहिए। छोटी-छोटी समस्याओं के लिए परेशान नहीं करना चाहिए। समस्या हल नहीं हो रही हो तो कर्मी को उच्च अधिकारी को बताना चाहिए।

संपत्ति की घोषणा करने की अपील
कुरियन जोसेफ ने नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपनी चल अचल संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करने की अपील की। इससे लोगों को मालूम होगा कि उनके प्रतिनिधि के पास क्या-क्या है। इससे कामकाज में पारदर्शिता भी आएगी।

पशु बलि के सवाल ने उलझाए न्यायाधीश

supreme court justice kurien joseph official visit to shimla.

सामाजिक चुनौतियों से कैसे निपटा जाए विषय पर गेयटी थियेटर में आयोजित कार्यक्रम में न्यायाधीश कुरियन जोसेफ स्कूली बच्चों से रूबरू हुए। विभिन्न सामाजिक बुराइयों पर चर्चा करते हुए कुरियन जोसेफ ने कहा कि अन्याय को सहन मत करो, एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। अगर सरकारी विभागों में आपकी सुनवाई नहीं होती है तो कोर्ट के दरवाजे सभी लोगों के लिए खुले हैं। स्कूली बच्चों ने इस दौरान न्यायाधीश ने स्कूली बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए।

इस अवसर पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव शर्मा, त्रिलोक चौहान, सुरेश्वर ठाकुर, धर्म चंद चौधरी, पीएस राणा सहित मेयर संजय चौहान, डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर, आयुक्त अमरजीत सिंह, संयुक्त आयुक्त विधि जोगेंद्र चौहान, पूर्व मेयर आदर्श सूद, मनोज कुमार, जैनी प्रेम, मधू सूद सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ पोर्टमोर स्कूल की छात्राओं ने वंदे मातरम की प्रस्तुति से किया।

गेयटी थियेटर में स्थानीय स्कूल की एक छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुरियन जोसेफ से पशु बलि पर लगी रोक का सवाल पूछकर उन्हें उलझा दिया। छात्रा ने सवाल किया जब पशु बलि पर रोक लग सकती है तो दुकानों में बिकने वाले मीट पर रोक क्यों नहीं लगती? इस सवाल पर न्यायाधीश कुछ क्षण के लिए चुप हो गए फिर उन्होंने कहा कि पूजा पाठ के लिए पशु बलि और दुकानों में बिकने वाला मीट अलग-अलग मामला है।

बच्चों ने पूछे जोसेफ से सवाल
सवाल: लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं कैसे कम होंगी?
जवाब: महिलाएं समाज का कमजोर वर्ग नहीं, मजबूत वर्ग है। छेड़छाड़ रोकने को रियेक्ट करना पड़ेगा।

सवाल: भ्रष्टाचार समाज में तेजी से फैल रहा है, यह कब खत्म होगा?
जवाब: अगर बच्चे स्कूल में पेपर देते समय चिटिंग करते हैं तो यह भी भ्रष्टाचार है। चिटिंग मत करो, भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

सवाल: आवाज उठाने पर और लोग मदद नहीं देंगे, इसलिए डरते हैं?
जवाब: एकजुट होकर आवाज उठाओगे तो कोई आवाज को नहीं दबा सकता।

सवाल: जाति का भेदभाव कब दूर होगा?
जवाब: जाति भेदभाव को लेकर समाज को सोच बदलनी होगी।

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