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मादा बंदरों के पेट चीरकर की जा रही नसंबदी

Tue, 21 Apr 2015 09:48 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 21 Apr 2015 09:48 PM IST
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Sterilization of monkeys cruelty in himachal.

बंदर नसबंदी केंद्र ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। यहां मादा बंदरों का गर्भ जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड आदि का कोई इंतजाम नहीं है। मादा बंदरों को नसबंदी के नाम पर एनेस्थीसिया देकर उनके पेट की चीर फाड़ की जा रही है।

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पेट चीरने के बाद अगर उन्हें मादा बंदर के गर्भवती होने का पता चलता है तो वे दोबारा पेट सिल कर उन्हें छोड़ देते हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की चार सदस्यीय टीम ने हाल में ही शिमला केंद्र के औचक निरीक्षण कर यह दिल दहलाने वाली रिपोर्ट तैयार की है।
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बोर्ड ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि वे हिमाचल के छह केंद्रों में चल रहे बंदर नसबंदी कार्यक्रम को तुरंत बंद कर दें। बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट (वन्यजीव) को भेजी है।
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अप्रशिक्षित लोग पकड़ रहे बंदर

Sterilization of monkeys cruelty in himachal.

जांच रिपोर्ट में बिना केंद्र सरकार की अनुमति के गर्भवती मादा बंदरों को पकड़ने और उनके परिवहन के तौर-तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। गैर वैज्ञानिक तरीके से अप्रशिक्षित लोग बंदरों को पकड़ रहे हैं और घसीटकर केंद्र तक लाए जा रहे हैं।

नसबंदी के बाद जहां बंदरों को रखा जाता है, वहां की हालत बेहद खराब है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2007 से कार्यक्रम चला रहे हैं, लेकिन बंदरों की गणना का तरीका नहीं है।

प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव जेएस वालिया के मुताबिक भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की रिपोर्ट फर्जी है। व्यक्तिगत तौर पर मैं खुद सभी नसबंदी केंद्रों का निरीक्षण कर रहा हूं। किसी स्तर पर कोई क्रूरता या गलत नहीं किया जा रहा है।

वहीं भारतीय जीव जंतु बोर्ड डा. मनी लाल और गौरी मौलेखी के अनुसार हिमाचल सरकार को नसबंदी कार्यक्रम तुरंत बंद करना चाहिए। कार्यक्रम का मूल्यांकन करें। नसबंदी सेंटरों पर बड़े पैमाने पर खामियां हैं। मिल रहे बजट का ऑडिट भी होना चाहिए।

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