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Shimla News: बंगाला कॉलोनी अतिक्रमण पर नगर निगम और वन विभाग से स्टेटस रिपोर्ट तलब
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली में स्थित बंगाला कॉलोनी में अतिक्रमण से संबंधित नगर निगम और वन विभाग से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट को बताया गया है कि वन भूमि पर नगर निगम ने खुद एक वार्ड कार्यालय बनाया है जिसका उद्घाटन 10 अक्तूबर 2015 को हुआ था। अदालत ने नगर निगम को हलफनामे में यह भी बताने को कहा है कि उक्त कार्यालय के निर्माण के लिए क्या कोई नक्शा और योजना स्वीकृत की गई थी। यदि स्वामित्व नगर निगम के पास नहीं था तो इसका निर्माण किस आधार पर किया गया और निर्माण की लागत कितनी थी। मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर को होगी। यह मामला मुख्य रूप से बंगाला कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण से संबंधित है। अदालत ने प्रतिवादी डिवीजन फॉरेस्ट मंडल शिमला के माध्यम से जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है कि नगर निगम शिमला ने एसडीएम शिमला को बंगाला कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण की फाइलें तैयार करने के लिए लिखा था और यह भी बताया गया कि खसरा संख्या 443 444, और 1662 को 15 अक्तूबर 2013 को वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली में स्थित बंगाला कॉलोनी में अतिक्रमण से संबंधित नगर निगम और वन विभाग से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट को बताया गया है कि वन भूमि पर नगर निगम ने खुद एक वार्ड कार्यालय बनाया है जिसका उद्घाटन 10 अक्तूबर 2015 को हुआ था। अदालत ने नगर निगम को हलफनामे में यह भी बताने को कहा है कि उक्त कार्यालय के निर्माण के लिए क्या कोई नक्शा और योजना स्वीकृत की गई थी। यदि स्वामित्व नगर निगम के पास नहीं था तो इसका निर्माण किस आधार पर किया गया और निर्माण की लागत कितनी थी। मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर को होगी। यह मामला मुख्य रूप से बंगाला कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण से संबंधित है। अदालत ने प्रतिवादी डिवीजन फॉरेस्ट मंडल शिमला के माध्यम से जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है कि नगर निगम शिमला ने एसडीएम शिमला को बंगाला कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण की फाइलें तैयार करने के लिए लिखा था और यह भी बताया गया कि खसरा संख्या 443 444, और 1662 को 15 अक्तूबर 2013 को वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था।