राज्य उपभोक्ता आयोग सदस्य की नियुक्ति रद्द, ये है वजह
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य उपभोक्ता आयोग में मीना वर्मा की नियुक्ति को कानून के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता सुनीता शर्मा को एक माह के भीतर राज्य उपभोक्ता आयोग की सदस्य नियुक्त करने के आदेश पारित किए हैं।
वरिष्ठ न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने सुनीता शर्मा की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार महिला सदस्य पद के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग की ओर से जुलाई 2016 में साक्षात्कार लिए गए थे। जिसमें चयन कमेटी की ओर से तैयार किए गए पैनल के मुताबिक सुनीता शर्मा का नाम मीना वर्मा के ऊपर दर्शाया गया था।
ये नियुिक्त रद्द करने का कारण
मगर राज्य सरकार ने पैनल के विपरीत सुनीता शर्मा की बजाय मीना वर्मा को सदस्य के पद पर नियुक्ति देने के आदेश दे दिए। दोनों उम्मीदवारों के साक्षात्कार में बराबर 11-11 अंक थे।
सुनीता शर्मा की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल देव सूद की दलील थी कि कानून के नजरिए से मीना वर्मा की नियुक्ति किसी भी तरीके से सही नहीं है। इसमें कानून के सिद्धांतों का सरेआम उल्लंघन किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय के कई मामलों में पारित फैसलों के मुताबिक अंक बराबर होने की स्थिति में अधिक आयु वाले को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान किया है। इसके अलावा वह वर्ष 1992 से हाईकोर्ट, प्रशासनिक प्राधिकरण, राज्य उपभोक्ता आयोग और अर्द्ध न्यायिक प्राधिकरणों के समक्ष वकालत कर रही हैं।
उनका अनुभव मीना वर्मा से कहीं अधिक है। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष मीना वर्मा की ओर से दी गई दलीलों में कोई ठोस कारण न पाते हुए उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया।