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Shimla News: बिना वेतन के विशेष बच्चों को पढ़ा रहा स्टाफ
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खास खबर शिक्षा
जिला में विशेष बच्चों योग्यता स्कूलों को जारी नहीं हुआ बजट
सरकार के सहयोग से 39 संस्थाएं कर रहीं स्कूलों का संचालन
वर्तमान में 1100 के करीब विशेष बच्चे कर रहे शिक्षा ग्रहण
जसवीर ठाकुर
ऊना। जिला ऊना में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूलों को अभी तक बजट नहीं मिल पाया है। इससे संबंधित प्रबंधन को स्कूलों का संचालन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर बात स्टाफ की करें तो स्टाफ को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है और स्टाफ बिना वेतन के ही ड्यूटी देने को विवश होकर रह गया है। सरकार के सहयोग से जिला ऊना में विभिन्न संस्थाएं इन स्कूलों का संचालन कर रही हैं। अभी तक बजट न मिलने के सूरत में स्कूल प्रबंधन के भी हाथ खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर विशेष बच्चों को मुहैया करवाई जा रही सुविधाओं के नाम पर भी संस्थाओं का संचालन करना स्कूलों के लिए टेरी खीर साबित होकर रह गया है। वर्तमान में जिले में ऐसे 39 स्कूलों का संचालन किया जा रहा है जिन्हें सरकार की ओर से विशेष योग्यता वाले बच्चों के स्कूलों का संचालन का कार्य सौंपा है। लेकिन बजट न मिलने की सूरत में वर्तमान में परिस्थितियां और भी खराब होती नजर आई हैं। ऐसे स्कूलों में 1100 के करीब विशेष बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहा है और उनके आने-जाने से लेकर रहने, खाने-पीने की भी तमाम तरह की व्यवस्थाएं ऐसे स्कूलों में की गई हैं। जिला प्रशासन भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। दूसरी ओर समाजसेवी संगठनों और अन्य स्रोतों से भी आय के नए स्रोत तैयार करके ऐसे बच्चों को समाज की मुख्य धारा के साथ जोड़ा जा रहा है। स्पेशल एजुकेटर भी तैनात किए गए हैं, जो विशेष बच्चों को उनके तरीके से पढ़ाई करने के लिए तैनात किए गए हैं लेकिन महंगाई के इस दौर में जहां एक ओर स्टाफ को दो महीने की तनख्वाह न मिलने की सूरत में अपने परिवार का भी भरण पोषण करने के लिए समस्या खड़ी हो गई है वहीं ऐसे स्कूल के संचालकों के सामने भी विकट परिस्थितियों का पहाड़ खड़ा हो गया है। इन स्कूलों में बच्चों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती है। शिक्षकों को विशेष योग्यता वाले बच्चों के लिए शिक्षा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में सरकार की ओर से ऐसे स्कूलों का संचालन कर रही संस्थाओं को बजट न मिलने की सूरत में पढ़ाई नियमित करने में समस्या खड़ी हो गई है।
उधर, डाइट ऊना के प्रिंसिपल राकेश अरोड़ा का कहना है कि विशेष योग्यता वाले बच्चों के स्कूलों में पिछले दो महीने से बजट सरकार की ओर से नहीं आया है। इसके चलते स्टाफ पिछले दो महीने से बिना वेतन के ही ड्यूटी दे रहा है और अन्य कार्यों का संचालन भी बिना बजट के ही किया जा रहा है।
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जिला में विशेष बच्चों योग्यता स्कूलों को जारी नहीं हुआ बजट
सरकार के सहयोग से 39 संस्थाएं कर रहीं स्कूलों का संचालन
वर्तमान में 1100 के करीब विशेष बच्चे कर रहे शिक्षा ग्रहण
जसवीर ठाकुर
ऊना। जिला ऊना में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूलों को अभी तक बजट नहीं मिल पाया है। इससे संबंधित प्रबंधन को स्कूलों का संचालन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर बात स्टाफ की करें तो स्टाफ को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है और स्टाफ बिना वेतन के ही ड्यूटी देने को विवश होकर रह गया है। सरकार के सहयोग से जिला ऊना में विभिन्न संस्थाएं इन स्कूलों का संचालन कर रही हैं। अभी तक बजट न मिलने के सूरत में स्कूल प्रबंधन के भी हाथ खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर विशेष बच्चों को मुहैया करवाई जा रही सुविधाओं के नाम पर भी संस्थाओं का संचालन करना स्कूलों के लिए टेरी खीर साबित होकर रह गया है। वर्तमान में जिले में ऐसे 39 स्कूलों का संचालन किया जा रहा है जिन्हें सरकार की ओर से विशेष योग्यता वाले बच्चों के स्कूलों का संचालन का कार्य सौंपा है। लेकिन बजट न मिलने की सूरत में वर्तमान में परिस्थितियां और भी खराब होती नजर आई हैं। ऐसे स्कूलों में 1100 के करीब विशेष बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहा है और उनके आने-जाने से लेकर रहने, खाने-पीने की भी तमाम तरह की व्यवस्थाएं ऐसे स्कूलों में की गई हैं। जिला प्रशासन भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। दूसरी ओर समाजसेवी संगठनों और अन्य स्रोतों से भी आय के नए स्रोत तैयार करके ऐसे बच्चों को समाज की मुख्य धारा के साथ जोड़ा जा रहा है। स्पेशल एजुकेटर भी तैनात किए गए हैं, जो विशेष बच्चों को उनके तरीके से पढ़ाई करने के लिए तैनात किए गए हैं लेकिन महंगाई के इस दौर में जहां एक ओर स्टाफ को दो महीने की तनख्वाह न मिलने की सूरत में अपने परिवार का भी भरण पोषण करने के लिए समस्या खड़ी हो गई है वहीं ऐसे स्कूल के संचालकों के सामने भी विकट परिस्थितियों का पहाड़ खड़ा हो गया है। इन स्कूलों में बच्चों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती है। शिक्षकों को विशेष योग्यता वाले बच्चों के लिए शिक्षा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में सरकार की ओर से ऐसे स्कूलों का संचालन कर रही संस्थाओं को बजट न मिलने की सूरत में पढ़ाई नियमित करने में समस्या खड़ी हो गई है।
उधर, डाइट ऊना के प्रिंसिपल राकेश अरोड़ा का कहना है कि विशेष योग्यता वाले बच्चों के स्कूलों में पिछले दो महीने से बजट सरकार की ओर से नहीं आया है। इसके चलते स्टाफ पिछले दो महीने से बिना वेतन के ही ड्यूटी दे रहा है और अन्य कार्यों का संचालन भी बिना बजट के ही किया जा रहा है।
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