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शिक्षा निदेशालय के आंकड़ों में खुलासा: सरकारी स्कूलों में 1.16 लाख बच्चे घटे, प्रति विद्यार्थी खर्च बढ़ा

Fri, 18 Sep 2026 10:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 18 Sep 2026 10:10 PM IST
सार

सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बीते चार वर्षों में 85 हजार से अधिक विद्यार्थी कम हुए हैं। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन और अन्य मदों पर होने वाला खर्च विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कम नहीं हुआ। इससे प्रति विद्यार्थी सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहा है। 

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hp Education Directorate data reveals: Himachal's govt schools see a drop of 1.16 lakh students; per student e
हिमाचल के सरकारी स्कूलों में कम हुए विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था पर सरकारी खर्च का बोझ कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बीते चार वर्षों में 85 हजार से अधिक विद्यार्थी कम हुए हैं। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन और अन्य मदों पर होने वाला खर्च विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कम नहीं हुआ। इससे प्रति विद्यार्थी सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के नामांकन और प्रति विद्यार्थी खर्च से जुड़े आंकड़े जारी किए।

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सबसे ज्यादा गिरावट प्राथमिक स्तर पर
सबसे ज्यादा गिरावट प्राथमिक स्तर पर दर्ज हुई है। वर्ष 2021-22 में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की पहली से पांचवीं तक 3,04,132 विद्यार्थी दर्ज थे। वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 2,18,969 रह गई। यानी चार वर्षों में 85,163 विद्यार्थी कम हुए। इस अवधि में प्राथमिक कक्षाओं में सरकारी नामांकन करीब 28 फीसदी घटा है। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन समेत शिक्षा व्यवस्था पर होने वाला खर्च कम नहीं हुआ। विभागीय गणना के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं में प्रति विद्यार्थी औसत मासिक खर्च 5,219 रुपये पहुंच गया है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने के बावजूद शिक्षकों के पद, वेतन और दूसरी सुविधाओं पर होने वाला स्थायी खर्च बना हुआ है। यह खर्च विद्यार्थियों की संख्या कम होने के साथ उसी अनुपात में कम नहीं हो रहा। ऐसे में प्रति विद्यार्थी सरकारी व्यय का अनुपात बढ़ रहा है। नामांकन में लगातार गिरावट के बीच यह स्थिति शिक्षा विभाग के सामने उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की चुनौती है।

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उच्च प्राथमिक में भी 31 हजार बच्चे घटे
छठी से आठवीं तक के उच्च प्राथमिक स्तर पर भी विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2021-22 में इन कक्षाओं में 3,50,650 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 3,19,289 रह गई। यानी चार वर्षों में 31,361 विद्यार्थी कम हुए। इस स्तर पर टीजीटी, एलटी, शास्त्री, पीईटी, डीएम समेत विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों के वेतन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रति विद्यार्थी औसत मासिक खर्च 3,915 रुपये आंका गया है। उच्च प्राथमिक स्तर पर भी विद्यार्थियों की संख्या घटने के बावजूद शिक्षक वेतन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य स्थायी खर्च जारी हैं। इससे प्रति विद्यार्थी खर्च का अनुपात बढ़ रहा है।

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आरटीई में निजी स्कूलों की फीस प्रतिपूर्ति बढ़ी
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के पात्र विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए सरकार ने नई दरें तय की हैं। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च के आधार पर प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी मासिक खर्च 5,219 रुपये और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 3,915 रुपये निर्धारित किए गए हैं। नई दरें वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए लागू रहेंगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के बाद आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति नए निर्धारित प्रति विद्यार्थी व्यय के आधार पर की जाएगी।

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