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सौर ऊर्जा का उपयोग कर इतने लाख की बचत करेगा NJHPS

Mon, 22 May 2017 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर Updated Mon, 22 May 2017 09:53 AM IST
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Solar Power Plant of 230 KW by Nathpa Jhakri Hydro Power Station

देश भर के विभिन्न राज्यों को 1500 मेगावाट पन बिजली की आपूर्ति करने वाले नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन (एनजेएचपीएस) अब सौर ऊर्जा से भी बिजली बनाने लगा है। 230 किलोवाट प्लांट से 4 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उपयोग कर एनजेएचपीएस हर साल 32 लाख रुपये की बचत करेगा।

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बिजली की पुरानी फिटिंग बदलकर एलईडी लाइटें लगाकर बिजली खर्च को भी काफी कम किया जा रहा है। परियोजना क्षेत्र झाकड़ी में करीब 3500 वर्गमीटर में 230 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट चालू कर दिया है। इस प्लांट से पैदा हो रही बिजली का उपयोग पावर हाउस और प्रमुख कार्यालयों में किया जा रहा है।
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इससे महंगी पन बिजली परियोजना का खर्च कम किया जा सका है और सस्ती सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा। 740 सौर ऊर्जा पैनलों के माध्यम से प्रतिवर्ष 4 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन किया जाएगा। 

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एनजेएचपीएस के दफ्तरों में होगा सौर ऊर्जा का उपयोग

Solar Power Plant of 230 KW by Nathpa Jhakri Hydro Power Station

परियोजना प्रमुख संजीव सूद ने झाकड़ी में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि फरवरी में सर्जशाफ्ट में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए प्लांट स्थापित करने का काम शुरू किया गया था, जो 18 मई से बिजली उत्पादन में जुट गया है। यह प्रदेश का अभी तक का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र माना जा रहा है।

प्रदेश में सबसे पहले बड़ू साहिब परिसर में 220 किलोवाट का प्लांट स्थापित किया गया था। सूद ने कहा कि 2 करोड़ की लागत से बने इस सौर बिजली घर में हर साल लगभग 4 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होगा। पन विद्युत परियोजना की महंगी बिजली खर्च को कम करने के लिए प्रबंधन ने सौर ऊर्जा उत्पादन को महत्व दिया है। इस प्लांट के लगने से पावर हाउस, प्रमुख कार्यालय और कॉलोनी में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।

इससे हर साल 32 लाख रुपये की बचत होगी क्योंकि वर्तमान में परियोजना में उपयोग हो रही बिजली आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा के अधिक दोहन के लिए प्लांट की क्षमता बढ़ाने पर भी गौर किया जा रहा है। प्लांट की क्षमता 300 किलोवाट तक बढ़ाई जानी है। सौर ऊर्जा संयंत्र का लागत खर्च करीब 7 साल में पूरा होने की उम्मीद है।

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