रहस्यमयी लेखिका स्नोवा बॉर्नो आई और फिर गायब हो गई
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रूमानी कहानियों के लाजवाब शिल्प और अपनी अलग तरह की भाषा शैली से देश के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अपना अलग मुआवरा विकसित कर चुकी प्रदेश की कथित रहस्यमयी लेखिका स्नोवा बॉर्नो अचानक प्रकट हुई और गायब हो गई।
वर्ष 2008 से 2012 तक ..मेरा अज्ञात तुम्हें बुलाता है, लो मैं आ गई तुम्हारे पास, मुझे घर तक छोड़ आइए और थियोसॉफिकल कहानी बार्दो से साहित्यिक फलक पर एकाएक छा जाने वाली स्नोवा के अस्तित्व को लेकर हालांकि रहस्य से पूरी तरह पर्दा नहीं उठा है। लेकिन अभी हाल ही में स्नोवा बॉर्नो लेह...नामक फेसबुक प्रोफाइल पेज से स्नोवा बार्नो ने अपने ताजा चित्रों सहित पाठकों से दिल की बातें साझा की हैं।
फेसबुक पेज पर स्नोवा के नाम से शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक स्नोवा ने कहा कि..पाठकों ने मेरी कहानी और कविताओं को सराहा, उसके लिए मैं हृदय से आभारी हूं। मेरा मूल उद्देश्य साहित्यिक रचना के बजाय कुछ और है। कुछ समय के लिए अपने मेंटर सैन्नी अशेष और आप सब के बीच हूं। इसी के साथ फेसबुक पर स्नोवा बार्नों लद्दाख के नाम से बना पेज गायब हो गया।
सामने नहीं आती लेखिका
हिमाचल के प्रसिद्ध साहित्यकार सैन्नी अशेष का कहना है कि वे स्नोवा के सहलेखक के रूप में उनका काम देखते हैं और वह सामने नहीं आतीं। अचानक 11 अक्तूबर को सनसनी फैली कि स्नोवा अशेष के साथ मनाली में हैं और इसकी घोषणा स्वयं कर रही हैं। स्नोवा के फेसबुक पेज पर यह सब शेयर भी हुआ। अशेष का कहना है कि वह आई और अचानक लौट गई।
जादुई लेखिका स्नोवा ने 2008 के वर्ष में हिंदी साहित्य में अपनी अनोखी कहानियों से तूफान उठा दिया था। प्रसिद्ध साहित्यकार-संपादक स्व.राजेंद्र यादव ने स्नोवा की पहली कहानी मुझे घर तक छोड़ आइए छापी तो सबसे बड़े समीक्षक नामवर सिंह ने कहा था कि कहानी पढ़कर मैं चकित रह गया।
मैंने ऐसी अद्भुत और लाजवाब कहानी कभी नहीं पढ़ी। उनकी कहानियों के नयेपन और अनोखेपन से ऐसा जादू जगा कि लेखक, संपादक और पाठक इस रहस्यमयी लेखिका की तलाश में निकल पड़े। मगर मनाली के पते से लिखने वाली लेखिका से मिलना असंभव हो गया।
फिर उठ रहे सवाल
स्नोवा के इस तरह अवतरित होने पर फिर सवाल उठने लगे हैं। हिमाचल के लेखकों ने सवाल उठाया है कि क्या गांरटी की इसी स्नोवा ने वो सारी कहानियां लिखी हैं? अगर यह स्नोवा है तो सबके सामने क्यों नहीं आती? कहीं ऐसा तो नहीं कि मनाली के चर्चित साहित्यकार सैन्नी अशेष किसी विदेशी लड़की को स्नोवा के नाम पर फेसबुक पर प्रकट कर रहे हैं? कई सवाल हैं जिनके जवाब अभी अनुत्ततरित हैं। खुद अशेष भी इस पर ज्यादा कुछ कहने को राजी नहीं।