बाल कल्याण समिति सिरमौर की अध्यक्ष को पद से हटाया
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प्रदेश सरकार ने बाल कल्याण कमेटी सिरमौर की चेयरपर्सन को पद से हटा दिया है। इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सामाजिक अधिकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव निशा सिंह की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की।
विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना में कहा गया है कि चेयरपर्सन अपनी जिम्मेवारी का ठीक से निर्वाह नहीं कर पाईं। इस बाबत उन्हें नोटिस जारी किया गया था। लेकिन इस पर भी वे संतोषजनक जवाब देने में विफल रहीं।
अधिसूचना के अनुसार चेयरपर्सन अपने दायित्व को निभाने में असफल रही हैं। अधिसूचना में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2005 के उल्लंघन की बात भी कही गई है।
उधर, चेयरपर्सन का कहना है कि उन्होंने अनधिकृत आश्रम में 22 बच्चे रखने का मामला न्यायालय और सरकार के संज्ञान में लाया था। यह कार्रवाई उसी की सजा के तौर पर की जा रही है।
जानकारी के अनुसार सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन विजयश्री गौतम को एक मामले में 6 नवंबर 2018 कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 10 दिसंबर 2018 को दिए गए जवाब से प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ।
ऐसे में जांच बैठाई गई। जांच में खुलासा हुआ कि चेयरपर्सन द्वारा कार्य को उचित तरीके से नहीं किया जा रहा। जांच में लापरवाही बरतने के अलावा मनमाने तरीके से कार्यालय संचालित करने की बात भी सामने आई।
बताया जा रहा है कि बाल कल्याण समिति के समक्ष 51 मामले लंबित हैं। उधर, बाल कल्याण कमेटी सिरमौर की चेयरपर्सन विजयश्री गौतम ने कहा कि यह इकतरफा कार्रवाई है। एक कारण बताओ नोटिस के आधार पर ये कार्रवाई की गई है।
जबकि हकीकत कुछ और ही है। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं मिला। कारण बताओ नोटिस के बाद उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा। उन्होंने बताया कि पच्छाद के नालकीरत में कुछ लोगों द्वारा अनधिकृत तरीके से 22 बच्चों को रखा गया है।
इसकी शिकायत न्यायालय और सरकार से किये जाने की उन्हें सजा मिली है। नालकीरत में चल रहे बाल आश्रम चलाने की सरकार और विभाग से कोई परमिशन नहीं ली गई है। लेकिन राजनीति और नौकरशाही के संरक्षण में ये कार्य बेरोकटोक चल रहा है। उन्होंने कहा कि अपने काम को आगे रखकर उन्होंने अपने परिवार की भी परवाह नहीं की।