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Shimla News: साहब, मालूम नहीं किसकी नजर लग गई मेरे शहर को

Wed, 16 Aug 2023 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Aug 2023 11:25 PM IST
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Sir, don't know whose
caught sight of my city
लोग बोले, अब तो पैदल चलने में भी लगता है डर
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प्रसव पीड़ा से कराह रही नेहा पैदल पहुंची केएनएच



साहब पता नहीं मेरे शहर को किसकी नजर लग गई। अब तो पैदल चलने में भी डर लगता है। बचपन से जवानी और अब बुढ़ापा शिमला शहर में कट गया लेकिन इस खूबसूरत शहर में ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी। शिमला में भूस्खलन से हुए नुकसान को लेकर संवाददाता भारती शर्मा ने लोगों से बात की तो उन्होंने कुछ ऐसा ही कहा। पेश है लाइव रिपोर्ट:-







शिमला। समय : बुधवार सुबह 11 :45 बजे। स्थान : शहर का सबसे व्यस्त कार्ट रोड। सड़क खाली हैै। न तो बसें चल रही हैं न ही छोटे वाहन।

सेंट एडवर्ड स्कूल के पास पैदल चल रहे लोगों के चेहरों पर शहर में हुए भूस्खलन और मौतों का दर्द साफ झलक रहा था। नारायण सिंह शिंडल (76) निवासी मैहली ने कहा कि अब तो पैदल चलने में भी डर लगता है। पता नहीं कब कहां से पहाड़ या पेड़ गिरकर आ जाए। हिमलैैंड केे पास एक भवन का डंगा ढहने के बाद सर्कुलर रोड पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी।
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कोटखाई की रहने वाली नेहा प्रसव पीड़ा से कराह थी और पैदल ही कमला नेहरू अस्पताल की ओर अपने पति तथा बहन के साथ जा रही थी। दर्द का एहसास होने पर सुबह गाड़ी में पति के साथ अस्पताल के लिए स्वास्थ्य जांच के लिए निकली थी लेकिन टॉलैंड के पास उनकी गाड़ी को यह कहकर रोक दिया गया कि आगे भूस्खलन का खतरा है। गाड़ी आगे नहीं जा सकती। लिहाजा उस हालत में पैदल ही अस्पताल की तरफ इस उम्मीद से निकल पड़े कि रास्ते में शायद अस्पताल तक कोई लिफ्ट मिल जाए लेकिन नहीं मिली।
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लोअर खलीनी के रहने वाले जगदीश चंद ठाकुर (76) ने कहा कि 1971 में शिमला में इतनी बर्फ गिरी कि सारे पिछले रिकार्ड टूट गए थे। तब भी शिमला में इतनी तबाही नहीं हुई थी जैसे अब देख रहे हैं। मैहली की रहने वाली 60 साल की बिमला देवी को पैरों में दर्द है। घर से डीडीयू अस्पताल के लिए निकली लेकिन टाॅलैंड के पास बस से यह कहकर उतार दिया कि अब आगे बस नहीं जाएगी। यहां से डीडीयू करीब दो किलोमीटर है। रत्न चंद (62) कसुम्पटी से सुबह 9.30 बजे एजी आफिस के लिए अकेले चल पड़े थे। कहा कि स्वास्थ्य भी साथ नहीं दे रहा जरूरी काम है तो जाना होगा। लोगों बस यह कहे जा रहे थे कि आखिर यह सब कब बंद होगा और जिंदगी पहले की तरह पटरी पर कब लौटेगी इसका इंतजार हर शहरी को है।
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