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Shimla News: कैंसर अस्पताल में सिम्युलेटर मशीन को नहीं मिला लाइसेंस

Fri, 25 Oct 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Oct 2024 11:59 PM IST
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Simulator machine in cancer hospital did not get license
आईजीएमसी में 7.77 करोड़ में स्थापित की है मशीन
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ऑटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड मुंबई से लिया जाना है लाइसेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के कैंसर अस्पताल में स्थापित सीटी सिम्युलेटर मशीन को चलाने के लिए अभी तक लाइसेंस नहीं मिल पाया है। इस कारण कैंसर रोगियों को इस मशीन के जरिये उपचार करवाने की सुविधा नहीं मिल पाई है।


सीटी सिम्युलेटर मशीन के जरिये मुंह, खाने की नली, स्तन और बच्चेदानी के कैंसर का उपचार आसानी से होगा। अस्पताल में यह मशीन 7.77 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की है। अभी मशीन चलाने के लिए ऑटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड मुंबई की ओर से लाइसेंस जारी नहीं किया है। लाइसेंस के जारी होने के बाद ही इसे सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में हाल ही में सिटी सिम्युलेटर मशीन लगाई है। इस मशीन के जरिये चिकित्सक कैंसर प्रभावित अंग की थ्री डी इमेजिंग के जरिये रेडियो थैरेपी प्लान तैयार करते हैं।
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चिकित्सक थैरेपी की डोज कंप्यूटर से निर्धारित करते हैं। थ्री डी की तस्वीरों के जरिये केवल कैंसर वाली कोशिकाओं को टारगेट करके रेडियो थैरेपी दी जाती है। इस वजह से नॉर्मल टिशु कम क्षतिग्रस्त होंगे। रेडियो थैरेपी की वजह से जो साइड इफेक्ट होते हैं, वह भी बहुत कम हो जाएंगे। इस तरह की तकनीक के जरिये मिलने वाले उपचार के लिए मरीज चंडीगढ़ और दिल्ली जाते हैं। यहां पर उनका पांच से छह लाख रुपये खर्चा आता है। मशीन के स्थापित होने के बाद हिमकेयर और आयुष्मान के तहत सैकड़ों मरीजों को यहीं पर इसका लाभ मिलेगा। उपचार में बाहरी राज्य में जो खर्चा आता है वह भी कम हो जाएगा। कैंसर अस्पताल साल भर में औसतन 2000 हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं।
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क्या कहते है अधिकारी
मशीन की आउटपुट के टेस्ट ऑटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड मुंबई को भेजे हैं। इस प्रक्रिया में समय लगता है। ऐसे में टेस्ट को देखने के बाद ही लाइसेंस दिया जाएगा। इसके बाद ही मरीजों का परीक्षण मशीन पर किया जाएगा।

- डॉ. मनीष गुप्ता, रेडियो थैरेपी विभाग अध्यक्ष।


अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत
अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें लग गई हैं लेकिन इसे चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत है। इससे उपचार करवाने आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी पेश नहीं आएगी। बताया जा रहा है कि रेडियोथैरेपी विभाग की ओर से इस बारे में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अवगत करवा दिया है। मुख्यमंत्री ने पद भरने का आश्वासन दिया है।
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