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हिमाचल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को भी पेंशन का हक, राज्य सरकार की अपील खारिज

Thu, 24 Sep 2026 07:35 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 07:35 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी के रूप में सेवा शुरू करने वाले तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के पेंशन अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल जज के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें याचिकाकर्ता को ब्याज सहित पेंशन देने का निर्देश दिया गया था।

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Significant Himachal High Court ruling: Class III employees also entitled to pension; State Government's appea
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी के रूप में सेवा शुरू करने वाले तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के पेंशन अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल जज के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें याचिकाकर्ता को ब्याज सहित पेंशन देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने आदेश दिया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी बिधि चंद को 1 जनवरी 2018 से नौ फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से पेंशन का भुगतान किया जाए।

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भुगतान नहीं होने पर सरकार को 12 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा
निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर सरकार को 12 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा। मामले के अनुसार बिधि चंद को वर्ष 1984 में दैनिक वेतनभोगी के तौर पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद 1 जनवरी 1994 को उन्हें वर्क चार्ज का दर्जा दिया गया। वह 28 फरवरी 2003 को सेवानिवृत्त हुए। नियमित सेवा 10 वर्ष से कम, करीब नौ वर्ष होने के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें पेंशन देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। एकल जज ने 5 दिसंबर 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को 1 जनवरी 2018 से नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी।

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फैसले का दायरा अब केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक सीमित नहीं
खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुंदर सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का दायरा अब केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इस फैसले के अनुसार दैनिक वेतनभोगी के तौर पर की गई पांच वर्ष की सेवा को एक वर्ष की नियमित सेवा के बराबर माना जाता है। यदि किसी कर्मचारी की नियमित सेवा आठ वर्ष से अधिक, लेकिन 10 वर्ष से कम है, तो उसे 10 वर्ष की सेवा मानकर पेंशन की पात्रता दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बनाम रूप लाल मामले में सुंदर सिंह फैसले के इस सिद्धांत को तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर भी लागू किया है। बिधि चंद तृतीय श्रेणी पद से सेवानिवृत्त हुए थे, इसलिए वे भी पेंशन लाभ के हकदार हैं।

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