फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   Asian Games: Seema kumari daughter of Himachal, wins a medal for the country in the 10,000m race after 16 year

एशियन गेम्स: हिमाचल की बेटी सीमा ने 10 हजार मीटर दौड़ में देश को 16 साल बाद दिलाया पदक, पढ़ें सफलता की कहानी

Thu, 24 Sep 2026 08:41 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 08:41 PM IST
सार

जापान के आइची नागोया में महिलाओं की 10 हजार मीटर दौड़ में उड़न परी सीमा ने 32 मिनट 50.05 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। आखिरी चक्कर तक पदक के लिए कड़ी जंग के बाद सीमा ने तीसरा स्थान हासिल किया। 

विज्ञापन
Asian Games: Seema kumari daughter of Himachal, wins a medal for the country in the 10,000m race after 16 year
उड़नपरी सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की बेटी सीमा कुमारी ने गुरुवार को एशियन गेम्स के ट्रैक पर इतिहास रच दिया। जापान के आइची नागोया में महिलाओं की 10 हजार मीटर दौड़ में उड़न परी सीमा ने 32 मिनट 50.05 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। आखिरी चक्कर तक पदक के लिए कड़ी जंग के बाद सीमा ने तीसरा स्थान हासिल किया। उनकी इस कामयाबी के साथ ही इस स्पर्धा में भारत का 16 साल का पदक का इंतजार खत्म हो गया। एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 हजार मीटर दौड़ में भारत को इससे पहले 2010 में प्रिजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक दिलाया था। यह एशियन गेम्स के इतिहास में इस स्पर्धा में भारत का तीसरा पदक है। मौजूदा एशियन गेम्स के एथलेटिक्स में भारत का पहला पदक है। 

विज्ञापन

आखिरी चरण में वापसी कर मेडल अपने नाम किया।
सीमा शुरुआत में आगे थी, लेकिन बीच में वह पीछे रह गईं। हालांकि, उन्होंने आखिरी चरण में वापसी कर मेडल अपने नाम किया। स्पर्धा में बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32:39.18 का समय लेकर स्वर्ण और जापान की नोजोमी तनाका ने 32:41.54 के समय के साथ रजत पदक जीता। सीमा का सफर चंबा के रेटा गांव से शुरू हुआ। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने दौड़ की तैयारी की। वर्ष 2015 में उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण की योजना के तहत धर्मशाला के साई केंद्र में प्रशिक्षण के लिए हुआ। इसके बाद उनकी प्रतिभा को बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का मंच मिला। वर्ष 2018 में वह खेलो इंडिया योजना से भी जुड़ीं। सीमा ने इसके बाद लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2024 में हांगकांग में हुई 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में उन्होंने 10 हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीता।

विज्ञापन
विज्ञापन

2026 में भी लगातार सुधारा खेल
एशियन गेम्स से पहले सीमा ने इस साल 10 हजार मीटर में 32:02.43 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दर्ज है। एशियन गेम्स के फाइनल में उन्होंने 32:50.05 का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

विज्ञापन

उड़नपरी की अब तक की उपलब्धियां
2015: जूनियर राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3,000 मीटर में स्वर्ण पदक जीता।
2018: यूथ एशियन ओलंपिक क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया।
2022: राष्ट्रीय खेलों में 10,000 मीटर में स्वर्ण और 5,000 मीटर में रजत पदक जीता।
2023: राष्ट्रीय खेलों में 5,000 और 10,000 मीटर दोनों में स्वर्ण पदक जीते। सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी 10,000 मीटर का स्वर्ण और 5,000 मीटर का रजत उनके नाम रहा।
2024: हांगकांग में 17वीं एशियन क्रॉस-कंट्री चैंपियनशिप में 10,000 मीटर का स्वर्ण पदक जीता।
2025: कोलकाता में टाटा स्टील वर्ल्ड 25 के में स्वर्ण पदक जीता और 25 किलोमीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया-समय 1:26:04।
2026: 10,000 मीटर में 32:02.43 मिनट का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में सीमा को चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन और एशियन यूथ ओलंपिक क्वालीफिकेशन की रजत पदक विजेता के रूप में दर्ज किया गया है। सीमा की उपलब्धियों में राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण, एशियन क्रॉस-कंट्री का स्वर्ण और 25 किमी का राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रमुख पड़ाव हैं।

जीत के बाद अमर उजाला से बोलीं - अगला मिशन ओलंपिक मेडल
जीत के बाद अमर उजाला से बातचीत में सीमा ने कहा कि अगला लक्ष्य अमेरिका के लॉस एंजिल्स में वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक में देश को मेडल दिलाना है। अब पदक जीतने के बाद आराम नहीं करना है बल्कि ओलंपिक के लिए और मेहनत करनी है। 

कठिनाइयों के बीच बीता बचपन
सीमा का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। परिवार की आजीविका थोड़ी बहुत खेती और पशुपालन पर निर्भर थी। पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी मां केसरी देवी के कंधों पर आ गई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने में कसर नहीं छोड़ी। सीमा को प्रशिक्षण के लिए साई हॉस्टल धर्मशाला भेजा। यहां नियमित प्रशिक्षण ने उनके खेल को नई दिशा दी। गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ दौड़ का सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। सीमा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक अपने नाम किए। 2022 के राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने 10 हजार मीटर दौड़ में स्वर्ण और पांच हजार मीटर में रजत पदक जीता। लगातार उपलब्धियों ने चंबा की इस बेटी को खेल जगत में अलग पहचान दिलाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed