हैरान कर देगी श्राईकोटी माता मंदिर की ये परंपरा
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हिमाचल के श्री श्राईकोटी माता मंदिर से एक अनोखी परंपरा जुड़ी हुई है। रामपुर में 11000 फुट की ऊंचाई पर स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक मंदिर में पति और पत्नी मंदिर तो एक साथ जाते हैं, लेकिन माथा अलग-अलग टेकते हैं।
दोनों में से एक मंदिर के बाहर रहता है। जब एक माथा टेककर बाहर आएगा, तभी दूसरा भीतर जाएगा। ऐसा सदियों से हो रहा है। हालांकि शास्त्रों के अनुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पति-पत्नी के एक साथ करने पर ही पूर्ण होते हैं।
लेकिन मान्यता है कि श्री श्राईकोटी माता मंदिर में शैलपुत्री के रूप में विराजमान माता ऐसा न करने पर नाराज हो जाती हैं और दंपति में बिछोड़ा तय है। यही कारण है कि पांडवों के समय से बने इस मंदिर में आज भी पति-पत्नी एक साथ देवी के दर्शन नहीं करते हैं।
हर साल आते हैं हजारों श्रद्घालु
इस परंपरा के बावजूद भीमाकाली ट्रस्ट के तहत चल रहे इस मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं है। लोग सदियों से चली आ रही इस प्रथा को आज भी निभा रहे हैं।
ये है मान्यता
मंदिर के मुख्य पुजारी शशिभूषण शर्मा बताते हैं कि दंत कथा के अनुसार जब भगवान शिव और देवी पार्वती ने अपने दोनों बेटों की परीक्षा ली और उन्हें पूरे ब्रह्मांड का चक्र काटने को कहा तो गणेश ने शिव और पार्वती की परिक्रमा कर परीक्षा जीत ली।
कार्तिक पूरे ब्रह्मांड का चक्र काटने निकल पड़े। कार्तिक लौटे तब तक गणेश जी का विवाह हो गया। इसके बाद कार्तिक ने विवाह न करने का प्रण लिया। आज भी श्री श्राईकोटी के द्वार पर गणेश जी अपनी धर्मपत्नी के साथ विराजमान हैं।
देवी के दंड से चली है परंपरा
कार्तिक के शादी न करने के प्रण से देवी बहुत दुखी हो गईं और कहा कि जो भी पति-पत्नी एक साथ यहां उनके दर्शन करेगा उस दंपति को बिछुड़ने का दंड मिलेगा। पुजारी कहते हैं कि यही कारण है कि आज भी यहां पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी शशिभूषण शर्मा का दावा है कि देवी उन लोगों को भी संतान देती है, जिनकी हर जगह से उम्मीद टूट चुकी होती है। देवी ने ऐसे लोगों को भी संतान का सुख दिया है जिनको चिकित्सकों ने भी मना कर दिया था।
उन्होंने दावा किया कि करीब दो साल पूर्व आए आईजीएमसी शिमला के चिकित्सक दंपति को भी देवी ने संतान दी है।