इस जंगल के पात-पात पर सिर्फ मुर्दों का अधिकार
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सावधान! यहां जंगल के पात-पात पर सिर्फ और सिर्फ मुर्दों का अधिकार है। घनघोर जंगल और उसके बीचोंबीच हिमाचल प्रदेश जिला ऊना गगरेट के अंबोटा ग्राम पंचायत में स्थित है प्राचीन द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी।
मंदिर के चारों ओर घना जंगल लगभग पांच हजार वर्ग मीटर में फैला है। मंदिर के चारों ओर तीन श्मशानघाट हैं, जबकि एक ओर पवित्र सोमभद्रा नदी बहती है।
कहा जाता है कि इस प्राचीन द्रोण शिव मंदिर के घने जंगलों में कभी पांडव और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य धनुर्विद्या सिखाया करते थे। इस जंगल के तीन ओर लगभग ढाई सौ मीटर के फासले पर श्मशानघाट है।
सिर्फ चित्ता में इस्तेमाल होती है लकड़ी
मंदिर के पुजारियों अजय शर्मा व अश्वनी शर्मा के अनुसार पुराने समय में जिस किसी ने भी इस जंगल की लकड़ी को अपने निजी कार्य के लिए ले जाने की कोशिश की उसका सर्वनाश हो गया।
इसको लेकर क्षेत्र में कई कहानियां भी प्रचलित है। यही वजह है कि लोग यहां की लकड़ी का इस्तेमाल करने से डरते हैं।
फौजी खाना बनाने को ले गए, चिंता में काम आई
शिवबाड़ी के प़ुजारियों के अनुसार पुराने समय मे फौजी यहां आकर रुके थे। वे लाख मना करने के बाद भी खाना बनाने के लिए
यहां की लकड़ी अपने ट्रक में भरकर ले गए।
लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद उनका ट्रक दुर्घटना ग्रस्त हो गया और ट्रक में लादी गई लकड़ी उनकी चिता सजाने के काम में आई। अब कोई भी व्यक्ति इस जंगल की लकड़ी को घर में चूल्हा जलाने या अपने निजी कार्य के लिए घर नहीं ले जाते।
पुरातन किंवदंतियों से जुड़ी इस मंदिर की बहुत सी गाथाएं हैं। स्वयं प्रकट हुए इस अद्भुत शिवपिंडी के आगे शीश नवाकर जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है।
शिव भोले प्रसन्न होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस प्राचीन शिवमंदिर से बहुत से लोगों की गहरी आस्थाएं जुड़ी हुई हैं।