गुड़िया केस: सीएम वीरभद्र के करीबी माने जाते हैं CBI के हत्थे चढ़े SP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहुचर्चित गुडि़या मामले से जुड़े लॉकअप हत्याकांड में सीबीआई के हत्थे चढ़े एसपी डीडब्ल्यू नेगी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता है। सीबीआई ने आईजी समेत 8 पुलिस वालों के बाद अब शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को भी गिरफ्तार कर लिया है। मामले को दबाने और फर्जी केस बनाने में शामिल होने के आरोप में एसपी डीडब्ल्यू नेगी पर यह कार्रवाई की गई है।
सीबीआई ने रेलवे बोर्ड भवन शिमला स्थित अपनी शाखा में लंबी पूछताछ के बाद वीरवार दोपहर बाद नेगी को गिरफ्तार किया। गुडि़या प्रकरण के दौरान नेगी शिमला जिला के पुलिस अधीक्षक थे। वे गुडि़या मामले की जांच को बनाई गई पुलिस एसआईटी में भी शामिल थे।
नेगी वर्तमान में विजिलेंस की विशेष जांच इकाई के एसपी हैं। गौरतलब है कि सीबीआई गुडि़या मामले में ही आईजी जहूर एच जैदी, डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मचारियों को करीब तीन माह पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में कंडा जेल में हैं।
वीरभद्र सरकार में रहे शिमला के एसपी
वीरवार को गिरफ्तारी के बाद एसपी नेगी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने नेगी को 20 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गुडि़या और लॉकअप मामले की जांच कर रही सीबीआई पिछले कुछ समय से एसपी डीडब्ल्यू नेगी से लगातार पूछताछ कर रही थी।
उन्हें गिरफ्तार करने की पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। सीबीआई का दावा है कि कुछ तथ्यों के पुष्ट होने में वक्त लग गया। इस कारण नेगी की गिरफ्तारी में देरी हुई। मूल रूप से किन्नौर निवासी पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता है।
नेगी को पिछली कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री के सुरक्षा अधिकारी रहे थे। वर्तमान वीरभद्र सरकार में शिमला जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके डीडब्ल्यू नेगी के पास विजिलेंस ब्यूरो का अतिरिक्त कार्यभार पहले से ही रहा है। गुडि़या मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई के बावजूद उनके पास विजिलेंस ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक का कार्यभार पूर्ववत रखा गया। उन्हें केवल एसपी शिमला पद से हटाया गया था।