नहीं सुलझी केएनएच में बच्चा बदलने की गुत्थी, नाकाम रही पुलिस
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शिमला के कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में एसपी शिमला ने हाईकोर्ट में पाक्षिक स्टेट्स रिपोर्ट दायर कर दी है। जांच रिपोर्ट में एसपी शिमला डीडब्लयू नेगी ने बताया कि बच्चा बदलने के बाद जांच टीम ने कमला नेहरू अस्पताल के लेबर रूम का दौरा किया, लेकिन प्रसूति विभाग के विभागाध्यक्ष के छुट्टी पर होने के कारण उन्हें जांच में शामिल नहीं किया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन जांच को प्रभावित करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच पेशेवर तरीके से कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच अधिकारी ने एक दाई रूप देवी और स्टाफ नर्स पुष्पा देवी को गिरफ्तार भी किया था।
इनकी ड्यूटी 26, 27 मई को लेबर रूम में लगाई गई थी। पुलिस ने केएनएच के लेबर रूम में अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की 26 मई को शाम 5 बजे से 27 मई शाम 8 बजे तक की फुटेज देने को भी कहा है। कुछ मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी मोबाइल कंपनियों से मांगी गई है। यह जानकारी अभी आना बाकी है।
अस्पताल कर्मियों ने बदल दिए थे बच्चे
ज्ञात रहे कि प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को इस मामले की पाक्षिक रिपोर्ट कोर्ट में दायर करने के आदेश जारी किए थे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने शीतल की ओर से दायर याचिका को निपटाते हुए दिए थे।
26 मई को कमला नेहरू अस्पताल में शीतल ने एक बच्चे को जन्म दिया था। मौके पर मौजूद किसी नर्स ने उससे कहा था कि उसके बेटा हुआ है लेकिन बाद में उसे बेटी दे दी गई। दोनों प्रार्थियों शीतल और अनिल कुमार ने अपने स्तर पर इस गड़बड़ी की छानबीन की।
इस छानबीन के दौरान उन्हें कुछ लोगों ने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल में बच्चों की अदला बदली वाले गिरोह सक्रिय है। इसके बाद उन्होंने खुद ही उन्हें सौंपी गई बच्ची का डीएनए टेस्ट करवाया। डीएनए में वह बच्ची उनकी नहीं पाई गई। पुलिस जांच के बाद भी यह साबित हो गया था कि बच्चे को बदला गया। 26 अक्तूबर को हाईकोर्ट की दखल के बाद दोनों बच्चों को उनके असली माता पिता को सौंप दिया गया था।