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Shimla News: अधिवक्ताओं ने राज्य सचिवालय का किया घेराव, तीन घंटे तक की नारेबाजी, एफआईआर दर्ज

Tue, 02 Jun 2026 03:07 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 02 Jun 2026 03:07 PM IST
सार

राजधानी शिमला में प्रतिबंधित सड़कों पर पुलिस की सख्ती के विरोध में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सीएम सुक्खू से मुलाकात की जिसके बाद धरना प्रदर्शन को खत्म किया गया। पढ़ें पूरी खबर...

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Shimla News Advocates Insist on CM Stepping Out to Talk Protests Continue Outside Secretaria Know the Dispute
ओक ओवर से सचिवालय तक अधिवक्ताओं ने निकाल रोष रैली। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

शिमला शहर की प्रतिबंधित सड़क शिल्ली चौक-छोटा शिमला पर वाहनों की आवाजाही रोकने के खिलाफ अधिवक्ताओं ने मंगलवार को प्रदेश सचिवालय का घेराव किया। इस दौरान तीन घंटे तक चक्का जाम किया गया। अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं का कहना था कि सरकारी अधिकारी और रसूखदार नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं लेकिन कार्रवाई सिर्फ अधिवक्ताओं पर की जा रही है। सर्कुलर सड़क पर ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण वह हाईकोर्ट मामलों की सुनवाई के लिए समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं जिससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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इससे पहले अधिवक्ता मुख्यमंत्री से मिलने के लिए ओक ओवर पहुंचे थे लेकिन यहां सीएम के नहीं मिलने के कारण उन्होंने प्रदेश सचिवालय की ओर कूच किया। इस दौरान सैकड़ों अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए सुबह साढ़े ग्यारह बजे सचिवालय पहुंचे और सर्कुलर सड़क पर बैठ गए। इस दौरान प्रदेश सचिवालय के दरवाजे को बंद कर दिया गया। अधिवक्ता इस पर अड़े रहे कि मुख्यमंत्री बाहर आकर उनसे बातचीत करें। अधिवक्ता युद्धवीर सिंह ने कहा कि रसूखदार नियमों की हर रोज धज्जियां उड़ा रहे हैं। सरकारी गाड़ियों को सब्जी ढोने और अन्य कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि उन्हें हाईकोर्ट जाने से रोका जा रहा है। सरकारी गाड़ियां खाली प्रतिबंधित सड़कों पर घूमती रहती हैं। अधिवक्ताओं ने कहा कि शिमला क्लब से आगे भी नियमों को ताक पर रखकर अफसरों और नेताओं की गाड़ियां खड़ी हो रही हैं जबकि उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस दौरान आईपीएस अधिकारी मेहर पंवर ने अधिवक्ताओं से बातचीत करके मामले को शांत करवाने की कोशिश की लेकिन वह अपनी मांगों को अड़े रहे। दोपहर ढाई बजे के बाद अधिवक्ताओं से मुख्यमंत्री ने बातचीत की जिसमें हाई पावर समिति के गठन की बात कही। इसके बाद अधिवक्ताओं ने अपना धरना खत्म किया।


 
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परमिट फीस 15,000 करने पर भी जताया विरोध
अधिवक्ताओं ने प्रतिबंधित मार्गों की परमिट फीस बढ़ाने पर भी विरोध जताया। उन्होंने कहा कि पहले परमिट राशि तीन हजार रुपये थी जिसे अब बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपये कर दिया है। इस वजह से अधिवक्ताओं को इस भारी भरकम राशि का वहन करना आसान नहीं है। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग उठाई कि उन्हें पर सामान्य फीस पर परमिट जारी किए जाएं।

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अलग-अलग जगहों पर है कोर्ट : हिमेंद्र

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हिमेंद्र चंदेल ने कहा कि अधिवक्ताओं को शहर में अलग-अलग जगहों पर हाईकोर्ट, जिला सत्र न्यायालय चक्कर और अन्य न्यायालयों में जाना होता है। सर्कुलर सड़क पर ट्रैफिक जाम होने के कारण उन्हें प्रतिबंधित सड़कों का इस्तेमाल करना पड़ता है। सर्कुलर सड़क पर ट्रैफिक जाम होने से उन्हें कोर्ट पहुंचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अधिवक्ताओं को निशाना बनाकर रोका गया। इस बारे में प्रधान सचिव गृह को भी पत्र लिखा गया लेकिन मामले का कोई समाधान नहीं निकला। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही हाई पावर समिति बनाई जाएगी जो कि अधिवक्ताओं की सूची प्रदेश सरकार को सौंपेगी।

वकीलों के प्रदर्शन से सर्कुलर रोड पर जाम, हजारों लोग परेशान

प्रतिबंधित मार्गों पर चालान के विरोध में अधिवक्ताओं ने प्रदेश सचिवालय शिमला के बाहर तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी भी की। सचिवालय में अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के कारण करीब तीन घंटे तक वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध रही। वकीलों ने सुबह साढ़े ग्यारह से दोपहर ढाई बजे तक प्रदर्शन किया। इस वजह से शहरवासियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सचिवालय से संजौली और पुराना बस अड्डा की ओर वाहनों की कतारें लगी रहीं। इस दौरान एंबुलेंस और स्कूल के बच्चों को लेकर आ रहे निजी वाहनों को अधिवक्ताओं ने गुजरने दिया। पुलिस विभाग ने शहर के स्कूलों में छुट्टी को देखते हुए वैकल्पिक मार्गों से स्कूल की टैक्सियों को निकाला जिससे बच्चों को परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं देशभर से घूमने के लिए आने वाले सैलानी भी ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। मजबूरी में लोगों ने बसों और टैक्सियों से उतरकर पैदल ही गंतव्य के लिए सफर तय किया। हालांकि पुलिस ने पुराना बस अड्डा से संजौली के लिए चलने वाली बसों को बाया लक्कड़ बाजार होकर चलाया जिससे लोगों को कुछ राहत मिली।

महिला बोली-मेरा बेटा बीमार है, मुझे स्कूल जाने दो

जाम में फंसी बस में बैठी एक महिला मौके पर पहुंची और उन्होंने सड़क जाम करने को लेकर अधिवक्ताओं के सामने नाराजगी जताई। अंकिता नाम की महिला ने कहा कि उनका चार साल का बेटा स्कूल में है और वह उसे लेने जा रही हैं। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें जाने दिया जाए। हालांकि इसको देखते हुए अधिवक्ताओं ने वैकल्पिक व्यवस्था करके उन्हें गंतव्य के लिए भेज दिया।

सचिवालय घेराव कर सार्वजनिक परिवहन को ठप करने पर अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

 प्रदेश सचिवालय का घेराव करने सर्कुलर रोड पर सार्वजनिक परिवहन ठप करने के मामले में पुलिस ने अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अधिवक्ताओं ने करीब तीन घंटे तक सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया था। इस वजह से शहर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई और हजारों लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालत यह थी कि घंटों बसों समेत अन्य वाहन कतारों में खड़े रहे। मजबूरी में लोगों को पैदल गंतव्य के लिए रवाना होना पड़ा। पुलिस के मुताबिक यह घेराव बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर किया गया है जिससे आम जनता और वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। इसको देखते हुए पुलिस थाना छोटा शिमला में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्जकर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों और संगठनों के शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत तरीके से अपने विचार व्यक्त करने का लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन कानून का उल्लंघन कर सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध करना, यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करना और आम जनता को असुविधा पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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