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हिमाचल हाईकोर्ट: उम्रदराज होना पत्नी के प्रति पति की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी खत्म नहीं करता

Sat, 12 Sep 2026 05:08 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 12 Sep 2026 05:08 PM IST
सार

अदालत ने पति की बुढ़ापे की दलील खारिज करते हुए कहा कि 15 साल बाद 3,500 गुजारा भत्ता कोई अत्यधिक राशि नहीं है। उम्रदराज होना पत्नी के प्रति पति की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी खत्म नहीं करता है। 

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Himachal High Court: Advancing age does not absolve a husband of his moral and legal responsibility towards hi
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी के गुजारा भत्ते में बढ़ोतरी के खिलाफ दायर पति की आपराधिक समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पति की बुढ़ापे की दलील खारिज करते हुए कहा कि 15 साल बाद 3,500 रपये गुजारा भत्ता कोई अत्यधिक राशि नहीं है। उम्रदराज होना पत्नी के प्रति पति की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी खत्म नहीं करता है। अदालत ने फैमिली कोर्ट सरकाघाट के उस आदेश को पूरी तरह तर्कसंगत ठहराया, जिसमें 78 वर्षीय पति को अपनी पत्नी को 1,500 के बजाय 3,500 प्रति माह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कहा कि 15 साल बाद बढ़ोतरी पूरी तरह जायज है। वर्ष 2010 में तय किए गए 1,500 के भत्ते को 15 वर्षों बाद बढ़ाकर 3,500 प्रति माह करना किसी भी दृष्टि से अत्यधिक नहीं है। इस दौरान बढ़ी महंगाई और जीवन यापन के खर्चों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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अदालत ने याचिकाकर्ता पति की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह 78 वर्ष के वृद्ध हैं और केवल सामाजिक/वृद्धावस्था पेंशन पर निर्भर हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बुजुर्ग होना किसी व्यक्ति को अपनी पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं करता। सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता ने पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह किया था और उसकी दूसरी पत्नी के बेटों के नाम पर संपत्ति/भूमि दर्ज है। इसके अलावा पत्नी की जिरह के दौरान पति के पास गाड़ियां/ट्रक होने के दिए गए बयान को भी पति पक्ष की ओर से चुनौती नहीं दी गई थी। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में एक वृद्ध महिला 3,500 के गुजारा भत्ते और 1,500 की सामाजिक पेंशन से कैसे अपना गुजारा करेगी, यह सोचनीय है।

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