जेल में बने साबुन से कपड़े धो रहे कैदी, चरखा कातकर बनाई जा रहीं चादरें
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हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों को सुधारकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की कवायद रंग ला रही है। जेल में प्रशिक्षण लेने के बाद कैदी अब रोजमर्रा के इस्तेमाल की दर्जनों वस्तुएं बनाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। इन वस्तुओं को प्रदेश की सभी 12 जेलों में आदान-प्रदान के अतिरिक्त बाजार में भी बेचा जा रहा है।
शिमला की कंडा जेल में हर माह क्विंटलों के हिसाब से कपड़े धोने का साबुन बनाया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल प्रदेश की जेलों में सभी बंदी कर रहे हैं। नाहन जेल में तैयार सेनेटरी पैड भी सभी जेलों में बंद महिला कैदियों को मुहैया करवाए जा रहे हैं।
यहां के पुरुष कैदी चरखा कातकर कपड़ा, चादरें और अन्य वस्तुएं तैयार कर रहे हैं। कैदियों के बने सामान को प्रदर्शनियों और बाजारों में भी बेचा जा रहा है। इससे जेल प्रशासन को ही नहीं, कैदियों को भी मोटी कमाई हो रही है।
प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के बनाए सामान की तीन दिवसीय प्रदर्शनी सोलन के नगर परिषद हाल में लगी है, जिसमें सामान खरीदने वालों की भीड़ जुट रही है। शिमला की कैथू जेल में लोहे की कुर्सियां, गमलों को रखने के स्टैंड, ट्रंक, गर्म पानी करने वाले चूल्हे सहित अन्य सामान तैयार किया जा रहा है। शिमला की कंडा जेल में साबुन के अलावा लकड़ी की कई वस्तुओं सहित फर्नीचर का सामान तैयार हो रहा है।
सोलन में आयोजित प्रदर्शनी में बेकरी उत्पाद, सजावटी सामान, रेडिमेड गारमेंट्स, हथकरघा, फर्नीचर, टोपी, कंबल, शॉल, कोकोनेट, चॉकलेट, बिस्कुट, पीनट कुकीज, जीरा, पिसा हुआ धनिया, हल्दी, आटा, ब्रेड, ब्राउन ब्रेड, क्रीमरोल भी है, जो बाजार से सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। सहायक अधीक्षक (जेल) सोलन दीपक शांडिल ने बताया कि महानिदेशक कारागार ने कैदियों को सुधारने और उन्हें रोजगार देने में सराहनीय कार्य किया है। इसका असर कैदियों पर दिख रहा है। कारागारों में ही जेल की जरूरतों से संबंधित अधिकतर वस्तुएं तैयार की जा रही हैं।
सोलन जेल में सब्जियों के छिलकों से बन रही ऑर्गेनिक खाद
सोलन कारागार में कैदी सब्जियों के छिलकों और व्यर्थ पदार्थों को एक जगह एकत्रित कर केंचुआ खाद तैयार कर रहे हैं। यह खाद अब बाजार में एक, पांच और दस किलो की पैकिंग में बिकने लगी है। कैदी जेल परिसर में खाली जगह छोटे खेत बना उसमें साग, धनिया, मटर और लहसुन आदि फसलें उगा रहे हैं। इन फसलों से निकलने वाले व्यर्थ पदार्थों को केंचुआ खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।