खतरे की जद में शिमला-कालका हेरिटेज ट्रैक, जानिए हाल
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विश्व धरोहर शिमला-कालका रेल मार्ग लगातार खतरे की जद्द में आता जा रहा है। करीब 97 किमी लंबे रेल ट्रैक के इर्द-गिर्द अवैज्ञानिक ढंग से खनन हो रहा है। पहाड़ों को इस तरह काटा जा रहा है कि बरसात में ट्रैक तो बाधित होता ही है, रेल यात्री भी हादसे का शिकार हो जाते हैं।
शहरी क्षेत्रों में ट्रैक के इर्द-गिर्द कई बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। ट्रैक के किनारे कई ऐसे पेड़ हैं जो गिरे तो बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं। यहीं नहीं कई टनल बरसात में रिसती रहती हैं। दिल्ली का एनजीओ स्टीम रेलवे सोसायटी (आईएसआरएस) ट्रैक की कई खामियों पर चिंता जता चुका है।
यह घटनाएं खतरे की ओर कर रही इशारा
इस एनजीओ ने बहुमंजिला इमारतों को घातक करार दिया है। वर्ष 2013 में यूनेस्को की टीम भी इस पर चिंता जता चुकी है।
- वर्ष 2006 में धर्मपुर और बडोग के बीच इस ट्रैक पर सफर कर रही युवती के सिर पर पत्थर लगा था, जिससे उसकी मौत हो गई।
-2007 में कोटी के नजदीक बारिश में करीब 100 मीटर पटरी का हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। कुछ दिनों तक इस मार्ग पर आवाजाही ठप रही। बेतरतीब ढंग से हुए खनन से ट्रैक ध्वस्त हुआ।
- 2008 को हॉलीडे स्पेशल बड़ोग के आगे टनल नंबर 27 के पास डीरेल हो गई। जिससे मोहाली के एक युवक की बोगी और पहाड़ी में बीच फंसकर मौत हो गई। छह सवारियों भी चोटिल हुई थीं।
ट्रेन से गिरकर और कटकर कई मौतें
-हर साल बारिश में औसतन 6 से 7 बार भूस्खलन से ट्रैक बंद होता है। वर्ष 2014 में दो माह में ही 8 मर्तबा रेल मार्ग बाधित हुआ।
ट्रेन से गिरकर और ट्रैक पर कटकर कई मौतें हों चुकी हैं। दो साल में रेल विभाग के मुताबिक 10 से अधिक जानें चली गई हैं। इसमें चंबाघाट के पास एक इंजीनियर की रेल कार के नीचे आने से मौत हुई थी। जबकि दिल्ली निवासी की कोटी के पास गिरकर मौत हो चुकी है। कई लोग इस ट्रैक पर घायल हुए हैं।