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ऐसा था बस हादसे का आंखों देखा मंजर

Wed, 30 Jul 2014 02:02 PM IST
Updated Wed, 30 Jul 2014 02:02 PM IST
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shimla kadharghat bus accident

कढारघाट घाटी का नजारा खौफनाक था। ऊपर सड़क से बस खाई में गिरी और बीच से टूटकर दो हिस्सों में बंट गई। बस के परखच्चे उड़ने से सवारियां दूर जा गिरी। ये इलाका सुनसान है। करीब आधे घंटे बाद लोग घटनास्थल पर पहंचे।

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नीचे मंजर दिल दहला देने वाला था। केवल तीन-चार यात्री ही थे जो कराहकर अपने जिंदा होने का सुबूत दे रहे थे। बाकी यात्री सदमे और चोट से दम तोड़ चुके थे। समय-3.30 बजे, खबर मिलते ही आसपास के गांवों से लोग भागते दौड़ते दुर्घटनास्थल पर पहुंचे।
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सड़क से देखने पर दूर-दूर तक बस का नामोनिशान नहीं था। पूरी घाटी धुंध की आगोश में थी। हल्की बारिश के बीच स्थानीय लोगों ने दुर्घटनाग्रस्त बस से घायलों को निकालने के लिए खाई में उतरना शुरू किया।
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खाई में हर तरफ बिखरे पड़े थे शव

shimla kadharghat bus accident

करीब 4:00 बजे, शिमला-करला रूट पर जा रही बस दुर्घटना स्थल पर पहुंची। बस को रोक कर चालक अन्य यात्रियों के साथ मदद के लिए खाई में उतर गया। चारों तरफ घायल कराह रहे थे। शव बिखरे पड़े थे।

खाई में तो लाखें बिखरी पड़ी थीं। बस के नीचे भी तीन लाशें फंसी हुई थीं। चीख पुकार से पूरा कढ़ारघाट गूंज उठा। समय- 4:30 बजे, दुर्घटना स्थल पर एचआरटीसी के अधिकारी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पहुंचे।

रेस्क्यू टीम के खाई में उतरने के बाद सबसे पहले पांच लाशें सड़क तक पहुंचाई गईं। एचआरटीसी के कंडक्टर का क्षतविक्षत शव भी इसमें शामिल था। समय 5:00 बजे, दो घायलों को सड़क तक पहुंचाया गया। एक निजी गाड़ी में घायलों को सुन्नी अस्पताल की ओर रवाना कर दिया गया।

बारिश ने बचाव कार्य में डाला खलल

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समय 6:00 बजे, कढ़ारघाट में मुख्य सड़क पर करीब एक किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं और जाम की स्थिति बन गई। बारिश तेज होने के कारण करीब आधे घंटे तक राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ।

बारिश के कारण खाई में उतरने वाला अस्थायी रास्ता कीचड़ में तबदील हो गया। समय 7:00 बजे, सड़क में लोगों का तांता लगा हुआ था। खाई से जैसे जैसे शव सड़क में पहुंच रहे थे सड़क में खड़े लोगों के दिलों की धड़कने तेज हो रही थीं। सड़क किनारे शवों का ढेर लग चुका था।

करीब 15 शव सड़क तक पहुंचाए जा सके थे। समय 7:30 बजे, अंधेरे के कारण राहत कार्य में दिक्कत पेश आ रही थी। बसों के नीचे अभी भी शव फंसे थे। कड़ी मशक्कत के बाद दो महिलाओं के शव निकाले। जैसे-जैसे अंधेरा हुआ सन्नाटा बढ़ने लगा, लेकिन अपनों को खोने वालों की रोना जारी था।

बस हादसों पर बैठाई जांच

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उधर, परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि राज्य सरकार ने शिमला जिले के कढारघाट और मिहाणा एचआरटीसी बस हादसों पर मैजिस्ट्रीयल जांच बैठा दी है। कांगड़ा में हुई दुर्घटना की भी जांच हो रही है।

परिवहन मंत्री जीएस बाली ने मंगलवार को हुई इन तीनों दुर्घटनाओं पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अफसोस जताया कि हिमाचल की भौगोलिक एवं अन्य परिस्थितियां ही लगातार हो रहे सड़क हादसों के लिए जिम्मेवार हैं।

मंगलवार को इन दुर्घटनाओं के बाद जीएस बाली ने कहा कि शिमला के दोनों ही हादसे दुखद हैं। इस तरह से एक ही दिन में तीन-तीन सड़क दुर्घटनाओं के होने से वे व्यथित हैं। इनकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सड़कें ऐसी हैं, जिनमें हादसे रोके नहीं रुक रहे हैं। सड़कों के किनारे रेलिंग, पैरापिट आदि लगें तो हादसे कम हो सकते हैं।

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