शिमला: कविंद्र गुप्ता बोले- नौतोड़ के लिए तय हो पैमाना, जरूरतमंदों को ही मिले जमीन
किन्नौर में नौतोड़ को लेकर चल रहे आंदोलन पर राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं। वह पूरे मामले के गुण-दोष देख रहे हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी उनसे मुलाकात की है और उनके समक्ष यह मुद्दा रखा है।
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राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ भूमि आवंटन के लिए सही और समान पैमाना होना चाहिए। नौतोड़ पात्रों और जरूरतमंदों को ही मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में निरीक्षण की प्रक्रिया चली है। अब वह भी देख रहे हैं कि इस मामले में क्या व्यवस्था संभव हो सकती है। इसके लिए कानूनी प्रावधानों की भी जांच की जाएगी। किन्नौर में नौतोड़ को लेकर चल रहे आंदोलन पर राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं। वह पूरे मामले के गुण-दोष देख रहे हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी उनसे मुलाकात की है और उनके समक्ष यह मुद्दा रखा है। सोमवार को लोकभवन शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाल ही में इस संबंध में मानसून सत्र में पारित विधेयक पर उन्होंने कहा कि अभी यह मामला उनके पास नहीं आया है।
विश्वविद्यालयों को अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए भी प्रयास करने होंगे: राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए भी प्रयास करने होंगे, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भी संभावनाएं तलाशने की बात कही जा रही है। हिमाचल में नशे की स्थिति पर चिंता जताते हुए राज्यपाल ने कहा कि सीमा पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। बाहर से नशा आ रहा है। बड़े तस्करों को पकड़ना जरूरी है। पुलिस की कार्रवाई में आमतौर पर नशे का इस्तेमाल करने वाले लोग ही अधिक पकड़े जा रहे हैं। नशे की आपूर्ति के पीछे सक्रिय बड़े तस्करों तक पहुंचना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती उन 80 फीसदी नौजवानों को बचाना है, जो अभी नशे की चपेट में नहीं आए हैं। रोकथाम और जागरूकता पर भी ध्यान देना होगा।
'पर्यटन क्षेत्र को और विस्तार देने की जरूरत'
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में पर्यटन क्षेत्र को और विस्तार देने की जरूरत है। प्रदेश में कनेक्टिविटी को मजबूत करना होगा और हवाई सेवाओं को भी बेहतर करने की आवश्यकता है। ऐसे पर्यटन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाना चाहिए, जहां अभी पर्यटक नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी विकसित करने की जरूरत जताई। वैष्णो देवी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कटरा में धार्मिक पर्यटन को जिस तरह विकसित किया गया है, उससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के साधन विकसित हुए हैं और लोगों को आजीविका के बेहतर अवसर मिले हैं। हिमाचल में भी धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए इस दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यटन को उद्योग की श्रेणी में रखने की बात से भी सहमति जताई।
सरकारी डॉक्टरों का निजी प्रैक्टिस नहीं करना अच्छी बात
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में सरकारी डॉक्टरों का निजी प्रैक्टिस नहीं करना अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि कई जगह सरकारी नौकरी के बाद डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में लग जाते हैं। इससे सरकारी संस्थानों पर उनका पूरा ध्यान नहीं रह पाता और लोगों को अच्छी व किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में दिक्कत होती है।
केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष उठा रहे प्रदेश के मुद्दे
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल से जुड़े मुद्दों को वह स्वयं केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष उठा रहे हैं। इसके लिए विभिन्न हितधारकों से फीडबैक भी लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के महत्वपूर्ण विषयों को उचित स्तर पर उठाने के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं।