फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   shimla bus accident: himachal govt Helpless in road accidents cases

हादसों के आगे बेबस सरकार, अब झंझीड़ी स्कूल बस हादसे ने झकझोरा

Tue, 02 Jul 2019 11:16 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 02 Jul 2019 11:16 AM IST
विज्ञापन
shimla bus accident: himachal govt Helpless in  road accidents cases
- फोटो : अमर उजाला

हिमाचल की पिछली तमाम सरकारों की तरह ही यह सरकार भी बस हादसों के आगे बेबस नजर आ रही है। जब कोई हादसा हो जाए और जानें चली जाएं तो ही व्यवस्था को जाग आ रही है।

विज्ञापन


हादसा होते ही नई प्लानिंग होती है और बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के फरमान हल्के में लेने वाली नौकरशाही फिर गहरी नींद में सो रही है। नूरपुर, बंजार जैसे बड़े हादसों से भी सबक नहीं लिया जा रहा।
विज्ञापन


अब राज्य सचिवालय की नाक की सीध में हुए झंझीड़ी बस हादसे ने जयराम सरकार को फिर झिंझोड़ा है। जिन बच्चों ने अभी जीवन की दहलीज पर पांव रखा ही था, उनकी असमय मौत ने सबको हिला दिया है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व की सरकार के सत्ता में आने के चार महीने बाद ही कांगड़ा के नूरपुर में एक बड़ा हादसा हुआ। 9 अप्रैल, 2018 को हुई इस बस दुर्घटना मेें स्कूल बस खाई में गिर गई। 

इसमें 24 बच्चों समेत 28 की मौत हो गई। इस दिल दहलाने वाली घटना को बीते एक साल ही बीता है कि अब एक अन्य स्कूल बस उस राज्य सचिवालय से थोड़ी दूर नीचे ही दुर्घटनाग्रस्त होती है, जहां मुख्यमंत्री, मंत्री और पूरी सरकार बैठती है। इसमें दो बच्चे और एक ड्राइवर की मौत हो गई।

पांच बच्चों, कंडक्टर समेत छह घायल हो गए। विशेष बात तो यह है कि दस दिन पहले यानी 20 जून को ही कुल्लू के बंजार के बयोठ मोड़ के पास हुए बस हादसे में 46 लोगों की मौत हुई। इनमें 39 लोग घायल हुए।

इस हादसे के बाद भी खूब बडे़-बड़े ऐलान हुए। बसों में ओवरलोडिंग रोकने, सड़कों को दुरुस्त करने, लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था सुधारने जैसी बड़ी-बड़ी बातें हुईं, मगर यह सब धरातल पर लागू हुआ भी नहीं था कि राजधानी में ही यह बस दुर्घटना हो गई।

पिछले डेढ़ साल में और भी कई बस हादसे हुए हैं जिसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। हादसों का यह सिलसिला पिछली धूमल, वीरभद्र सरकारों में भी जारी था। अब सड़कों, बसों, गाड़ियों की तादाद बढ़ने के साथ ही यह बढ़ गया है। इन्हें रोकने को व्यवस्था फूलप्रूफ नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed